देश में 55% ब्राह्मण गरीबी रेखा से नीचे, असली दलित ब्राह्मण है, न आरक्षण न कोई सुविधा पर गाली हज़ार


मजहबी उन्मादी हो चाहे मिशनरियां चाहे हो सेक्युलर और लिबरल जमात, सबसे ज्यादा गालियाँ ये ब्राह्मणों को ही देते है, हाल ही में एजाज खान नाम का उन्मादी तो ब्राह्मणों को जहाँ देखो वहां मारों का ऐलान कर रहा था, इसके अलावा भीम आर्मी जैसे संगठन हो, ब्राह्मण हमेशा ही निशाने पर रहते है 

ब्राह्मणों के बारे में ये लोग बताते है की ब्राह्मण बड़े अत्याचारी होते है, ये अमीर है, इत्यादि इत्यादि 

पास असलियत ये है की आज वर्तमान में भारत में ब्राह्मण सबसे गरीब तबके में शामिल है, देश में 55% ब्राह्मण गरीबी रेखा के नीचे है, इनके पास न नौकरियां है, न जमीने है, न ही कोई धन दौलत, इनकी कमाई भारत सरकार द्वारा तय की गयी गरीबी रेखा से भी नीचे है 

फ्रेंच पत्रकार फ़्रन्कोइस गौटिएर जो की 2 दशको से भारत में रिसर्च का काम कर रहे है उन्होंने रिसर्च में बताया है की भारत में ब्राह्मण सबसे गरीब तबके में शामिल है और 55% ब्राह्मण गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी जी रहे है 

रिसर्च में पता चला की दिल्ली के पटेल नगर में 50% रिक्शा चलाकर ब्राह्मण है, इसी इलाके में 50 सुलभ शौचालय है जिनमे साफ़ सफाई का काम ब्राह्मण कर रहे है 

इसके अलावा 5 लाख से ज्यादा कश्मीरी ब्राह्मण तो कई दशको से अपने ही देश में रिफ्यूजी की तरह जी रहे है, आंध्र प्रदेश में घर में साफ़ सफाई, झाड़ू पोछा, बर्तन सफाई के काम करने वालो में 70% ब्राह्मण है, आंध्र प्रदेश में अधिकतर मंदिरों के पुजारी गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी जी रहे है 

स्कूलों और कॉलेज से भी ड्रॉपआउट होने वाले छात्रों में ब्राह्मण सबसे ज्यादा है, क्यूंकि इनको फीस में कोई छूट नहीं मिलती, न ही इनको आसानी से स्कॉलरशिप ही मिलती है, देश में 55% ब्राह्मणों की कमाई 650 रुपए प्रति महीने से भी कम की है, कर्णाटक में तो ये स्तिथि और भी ख़राब है, कर्णाटक राज्य में मुसलमानों की कमाई 794 रुपए है, दलितों की कमाई 680 रुपए है जबकि ब्राह्मणों की आमदनी मात्र 537 रुपए की है

मुसलमानों को अल्पसंख्यक के नाम पर सरकारी सुविधाओं और भत्तों का लाभ दिया जाता है, दलितों और पिछडो को भी आरक्षण और कई प्रकार के सरकारी लाभ दिए जाते है, पर ब्राह्मणों के लिए ऐसा कोई लाभ नहीं है, और स्तिथि ये है की ब्राह्मण सबसे ज्यादा गरीब है 

फ़्रन्कोइस गौटिएर कहते है की वर्तमान में सच्चाई ये है की ब्राह्मण ही असली दलित और शोषित है, जिन्हें कोई लाभ नहीं मिलता पर गालियाँ हज़ार मिलती है