खून में ही गद्दारी - भारत आये नेतान्याहू से नहीं मिला पर दुश्मन तुर्की के राष्ट्रपति की सेवा में पहुँच गया आमिर खान


मजहबी उन्मादियों को भले भारत में कितना भी नाम, पैसा, प्यार, सम्मान मिले पर वो रहेंगे मजहबी उन्मादी ही, इनके खून में ही गद्दारी है और इसी कारण इनका दिल मजहबी उन्मादी मुल्कों के लिए धड़कता है, चाहे वो पाकिस्तान हो या तुर्की 

इजराइल भारत का इस दुनिया में सबसे बड़ा मित्र है, 1999 की कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी आतंकवादी पहाड़ों की ऊंचाई पर बैठे हुए थे तब उनको निशाना बनाने के लिए इजराइल ने भारत को लजेर गाइडेड मिसाइल दी थी 

इजराइल ही एकमात्र देश है जो भारत के साथ खड़ा होने से पहले किन्तु परन्तु, इफ बट नहीं करता, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू भारत की यात्रा पर थे और वो मुंबई भी गए थे 

नेतान्याहू मुंबई बॉलीवुड से मिलने गए थे, उनका मकसद था की बॉलीवुड के लोग फिल्म शूटिंग और काम के लिए इजराइल आये, बेंजामिन नेतान्याहू से मिलने कई बड़े फ़िल्मी लोग, एक्टर, डायरेक्टर, प्रोडूसर पहुंचे थे 

पर नेतान्याहू का आमिर खान, शाहरुख़ खान, सलमान खान इत्यादि ने बहिष्कार कर दिया था, इन सभी के लिए मुल्क नहीं बल्कि मजहब पहले है, इनमे से कोई नेतान्याहू की मीटिंग में नहीं गया 

नेतान्याहू और इजराइल भारत के मित्र है पर भारत का खाने वाले मजहबी उन्मादी उनकी मीटिंग में नहीं गए पर ये मजहबी उन्मादी तुर्की जाकर वहां के राष्ट्रपति की बेगम के सामने नतमस्तक होने लगे 


आमिर खान इन दिनों फिल्म शूटिंग का बहाना बनाकर तुर्की गया है, आमिर खान वहां तुर्की सरकार के अधिकारीयों के साथ मीटिंग कर रहा है और इसी बीच वो वहां के राष्ट्रपति की बेगम से मिलने और उसे नमन करने भी चला गया 

अब तुर्की के बारे में भी जानिए 

भारत में आतंकवाद की फंडिंग से लेकर, इंटरनेशनल मंचों पर भारत विरोध और पाकिस्तान का साथ, तुर्की इन सब कामो में लिप्त है, तुर्की भारत में ISIS के आतंकवादियों को भी मदद कर रहा है और हर प्रकार के मजहबी उन्मादियों की फंडिंग कर रहा है 

इजराइल के प्रधानमंत्री से मिलने आमिर खान मुंबई में भी नहीं आया, पर तुर्की की राष्ट्रपति की सेवा में वो तुर्की पहुँच गया, इसे कहते है खून में ही गद्दारी