AAP नेता ताहिर हुसैन ने कुबूला - "मैं काफिर हिन्दुओ को सिखाना चाहता था सबक, इसलिए मरवाकर कईयों को फेंकवाया"


दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने न्यायिक हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने जानकारी दी है कि वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा का निवासी है। उसके तीन और भाई हैं, जिनके नाम हैं- नजर अली, शाह आलम और शाने आलम। 8वीं तक पढ़ा ताहिर हुसैन 1993 में अपने पिता के साथ दिल्ली आया था और दोनों पिता-पुत्र बढ़ई का काम करते थे।

शुरुआत में उसने अपने ही मकान में फर्नीचर कि फैक्ट्री खोली थी, जिसके माध्यम से वो विभिन्न कंपनियों के शोरूम तैयार करता था। बिजनेस बढ़ने के साथ उसने ग्रेटर नोएडा, बेंगलुरू और कोलकाता में भी अपनी फैक्ट्री के ब्रांच खोले। साथ ही उसने 2012-13 में दिल्ली के खजूरी खास में अपने लिए मकान खरीदा और वहाँ फैक्ट्री भी स्थापित की। उसी इमारत मे वो रहता भी था और साथ ही उसका दफ्तर भी उसी में था।

अपने बयान में ताहिर हुसैन ने बताया है कि वो आम आदमी पार्टी से निगम पार्षद चुना गया लेकिन पार्टी ने अभी उसे निलंबित कर रखा है। उसने बड़ा खुलासा किया है कि वो CAA के समर्थकों को सबक सिखाना चाहता था। उसके कबूलनामे के अनुसार, उसने कहा कि जिस तरह से CAA के विरोध मे दंगे हो रहे थे। इसके समर्थन मे भी धरनों कि तैयारी थी। दंगों कि साजिश ने बारे में उसने बताया है:

“मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”
 
ताहिर हुसैन ने पुलिस को बताया कि जब वो फरवरी 24, 2020 को अपने भाइयों एवं समर्थकों संग अपने दफ्तर मे बैठा था, तभी माहौल तनावपूर्ण हो गया और भीड़’ अल्लाहु अकबर’ व ‘मारो काफिरों को’ जैसे नारे लगाते हुए लाठी-डंडे से मुस्तैद थी। उसके समर्थकों ने ताहिर को बताया कि ‘हिन्दू लोग मुसलमानों के घरों मे आग लगा रहे हैं’, जिसके बाद उसे गुस्सा आ गया और उसने अपने साथियों से कहा कि अब हिंदुओं को सबक सिखाने का वक्त आ गया है।

ताहिर हुसैन ने जानकारी दी कि उसने मुस्लिम भीड़ को अपनी छत पर खड़े होकर गोलीबारी और पत्थरबाजी करने को कहा क्योंकि उसे लगता था कि उसका घर ऊँचा है तो वो हिंदुओं को आसानी से निशाना बना सकता है। उसने कबूल किया है कि भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई थी। उसने बताया कि उसके भाई शाह आलम ने समर्थकों संग मिल कर महक सिंह की पार्किंग में आग लगाई थी।

ताहिर हुसैन ने ये भी बताया है कि कैसे उसने सबूत अपने पक्ष मे बनाने के लिए चालाकियाँ कीं। उसने चाँदबाग पुलिस स्टेशन और PCR को अपने मोबाईल से कई कॉल्स किए। बकौल ताहिर, उसे पता था कि उसके बुलाने के बावजूद पुलिस नहीं आएगी क्योंकि मुस्लिम भीड़ इतनी मुस्तैद थी कि वो भारी से भारी पुलिस बल को भी मार के भगा सकती थी। उसने करावल नगर में हिंदुओं के दुकानों को आग के हवाले करने की बात भी कबूल की है। उसने कहा कि चारों ओर धुआँ ही धुआँ था।

उसने बताया कि शाम को जब पुलिस आई थी तो हिन्दू समुदाय के लोग ‘दिल्ली पुलिस ज़िन्दाबाद’ के नारे लगा रही थी और मुस्लिम लोग ‘अल्लाहु अकबर’ बोल रहे थे। इस दौरान ताहिर हुसैन जाकिर नगर मे अपने परिचित तारिक मोइन रिजवी के घर मे छिपा हुआ था। फिर वो मूँगा नगर में इलियास के घर में छिपा। वो इस दौरान भीड़ को फिर से भड़काने की साजिश रचता रहा। अगले दिन भी वो अपने घर गया लेकिन अर्धसैनिक बलों के जवानों को देख वापस लौट गया।

ताहिर हुसैन ने स्वीकार किया है कि चाँदबाग पुलिस के पास फरवरी 25, 2020 को उसके इशारे पर ही हजारों मुसलमानों की भीड़ जमा हुई थी। इसके बाद हिंदुओं की दुकानों को आग के हवाले किया जाने लगा, लूटा जाने लगा और पत्थरबाजी चालू हो गई। ताहिर ने कहा कि इस दौरान वो बार-बार पुलिस को फोन कर के अपने बचने की भूमिका भी तैयार कर रहा था। पूरे कांड को अंजाम देने के बाद वो छिपता फिरता रहा।

बता दें कि चार्जशीट में पुलिस ने ताहिर के यहाँ काम करने वाले दो कर्मचारियों को मुख्य गवाह बनाया है। इन दोनों की पहचान गिरिष पाल और राहुल कसाना के रूप में हुई है। दोनों ने पुलिस को बताया है कि वे 24 फरवरी को खजूरी खास इलाके में हुसैन के कार्यालय में ही मौजूद थे। इन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आखिर दंगों के दिन ताहिर हुसैन क्या कर रहा था और उस दिन उन लोगों ने क्या-क्या देखा। full-width