खुलासा - UPA शासन के दौरान भारत में तेजी से बेचा गया चीन का सस्ता माल, घरेलु उद्योगों को किया गया तबाह


सोनिया गाँधी ने भारत की सत्ता को 2004 में कब्जे में लिया था, साल 2004-2005 में चीन के साथ व्यापार घाटा 1 बिलियन डॉलर था. जो साल 2009-2010 में 19 बिलियन डॉलर हो गया.

सरकारी फाइलों में दर्ज यूपीए सरकार के समय का एक फैसला बताता है कि कैसे कांग्रेस ने चीन के प्यार में अंधी होकर देश के व्यापार को चीन के गोद में बिठाकर तबाह करने की साजिश रची थी.

साल 2008 में जब यूपीए सरकार सेल फोन, रबर प्लास्टिक के सामान बायोडीजल ऑर्गेनिक प्रोडक्ट नायलॉन और बांस जैसी वस्तुओं के आयात पर 12.5 फ़ीसदी से घटाकर 2.5 फ़ीसदी कर रही थी तो से पहले कांग्रेस ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एमओयू साइन कर चुकी थी. तारीख गवाह हैं अगस्त 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के बीच उच्च स्तरीय जानकारी और सूचनाएं साझा करने के लिए समझौता हुआ. उसके बाद साल 2008 से साल 2013 तक के बजट में चीन से आयात होने वाले सामानों पर टैक्स में जबरदस्त छूट दी गई.

उदाहरण के तौर पर अगरबत्ती के लिए उपयोग में आने वाली बांस की बात कर लें, भारत में बांस यूपी, बिहार, बंगाल से लेकर नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में बहुतायत में पाया जाता है, घरेलू बाजार में बांस की कोई कमी नहीं थी और इसलिए बांस के आयात पर 30 फ़ीसदी टैक्स लगाया हुआ था लेकिन यूपीए सरकार ने साल 2011-12 में इसे 30% से घटाकर 10 फीसदी कर दिया. 

इसका नतीजा यह हुआ कि भारत में चीन, थाईलैंड से आने वाले घरेलू बांस को चौपट कर दिया, बांस तो महज एक उदाहरण है ऐसे सैकड़ों आइटम थे जो यूपीए सरकार के समय टैक्स में छूट दिए जाने के कारण घरेलू उद्योग तबाह हो गए और सस्ता चीनी सामान बाजार पर हावी होता चला गया.

साल 2004-2005 में चीन के साथ व्यापार घाटा 1 बिलियन डॉलर था. जो साल 2009-2010 में 19 बिलियन डॉलर हो गया. जो बढ़कर साल 2013-14 में 36 बिलीयन डॉलर तक पहुंच गया. चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा था क्योंकि चीन का सस्ता माल भारत में तेजी से बेचा जा रहा था. इसके एवज में भारत के घरेलू उद्योग धंधे चौपट हो रहे थे.

यूपीए सरकार के दौरान चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली ग्रुप ऑफ मिनिस्टर ने जिसे ट्रेड एंड इकोनॉमिक्स रिलेशन कमेटी नाम से जाना जाता था, ने चीन के साथ व्यापार को बढ़ाने के लिए RCEP में शामिल होने के सिफारिश की. 

मनमोहन सिंह की नेतृत्व वाली उस जीओएम की सिफारिश और मंत्रालय के अधिकारियों की आपत्ति कि वह फाइल की कॉपी है, जिसमें साफ-साफ लिखा गया है कि अगर भारत आरसीएपी में शामिल हुआ तो यह भारत के व्यापार के लिए बहुत बड़ा धक्का होगा लेकिन इस आपत्ति को दरकिनार करते हुए, उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आर सी ई पी मैं भारत के शामिल होने पर फैसला ले चुके थे.

हालांकि बाद में मोदी सरकार ने RCEP में शामिल होने के फैसले से इनकार कर दिया. यूपीए सरकार के समय करीब 150 से ज़्यादा उत्पादों और वस्तुओं पर जैसे किशमिश पर आयत शुल्क 100 से घटाकर 30% किया गया. मेगा पावर प्रोजेक्ट, फर्टिलाइजर और कोल् माइनिंग के लिए टैक्स 0 % कर दिया गया जबकि कच्चे लोहे के प्लांट लिए ये टैक्स दर सिर्फ 5% रखी गई, एक अनुमान के मुताबिक इससे देश को 22 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ.

ये सब चीन के कंपनी और व्यपार को भारत में सुगम रास्ता मुहैया कराने के लिए किया गया, कांग्रेस , यूपीए सरकार और चीन का ये प्रेम त्रिकोण आज भारत के गले की हड्डी बन गया है. चीन भारत से लाखों करोड़ रुपये कमाकर अब भारत को आंख दिखा रहा है। भारत की भूमि पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है. full-width