कहीं दलित को मौत के घाट उतारा, तो कहीं आदिवासी को काटा, जीने नहीं दे रहे मजहबी उन्मादी


पिछले 2 दिन में एक के बाद एक 4 बड़ी घटनाएं सामने आई है जहाँ पर दलितों और आदिवासियों को मजहबी उन्मादियों ने मौत के घाट उतारा है, दलितों के घर जलाये है, दलितों की बेटियों को दबोचा है 

और बड़ी बात ये है की दलित-आदिवासी की राजनीती करने वाले तमाम लोग इसपर बिलकुल मौन है, ऐसे लोग जिनकी रोजी रोटी दलित-आदिवासी के नाम पर चलती है ऐसे लोग गायब है 

हम आपको एक के बाद एक सभी 4 बड़ी घटनाओं के बारे में फिर एक बार बता दें 

1 - जौनपुर में 400 मजहबी उन्मादियों ने दलितों के घरों को जलाया


जिन मजहबी उन्मादियों ने जौनपुर में घटना को अंजाम दिया उनके नाम भी पढ़िए 


2 - आज़मगढ़ में मजहबी उन्मादियों ने दलितों की बेटियों को उठाने की कोशिश की, विरोध में दलितों को बहुत मारा, मजहबी उन्मादियों की तस्वीर और नाम पढ़िए 


3 - असम के गुवाहाटी में इब्राहीम अली, दुलाल आलू, अरमान अली और हुसैन अली ने अपनी अम्मी मुनावारा खातून के साथ मिलकर आदिवासी लड़के के गले को चाक़ू से हलाल स्टाइल में काट डाला, काटकर आदिवासी लड़के को सड़क पर फेंक दिया 


4- गाज़ियाबाद में दलित लड़के जिसका नाम विवेक कुमार जाटव था उसे 3 मजहबी उन्मादियों ने रस्ते में मौत के घाट उतार दिया, दलित लड़के के आखिरी शब्द थे - "मुझे छोड़ दो, मुझे जाने दो, मेरी माँ मेरा इंतज़ार कर रही होगी"


ये 4 बड़ी घटनाएं सिर्फ 2 दिनों में घटित हुई है, शिकार बने है दलित और आदिवासी, और मजहबी उन्मादियों ने उनपर अत्याचार किये है, पर दलित-आदिवासी के नाम पर दूकान चलाने वाले तमाम तत्व गायब हो चुके है, इन 4 बड़ी घटनाओं पर पूरी तरह सन्नाटा मचा हुआ है full-width