पूर्व आर्मी चीफ ने बताया - सोनिया सरकार पाकिस्तान को दे देना चाहती थी सियाचिन, भारतीय सेना अपनी पे आ गई और ऐसा नहीं होने दिया



नेहरू ने आधा कश्मीर और लद्दाख चीन पाकिस्तान को दे दिया, आज भी लगभग आधा कश्मीर और लद्दाख पाकिस्तान और चीन के पास ही है

भारतीय सेना सियाचिन की कई दशकों से रक्षा कर रही है, कई सैनिको ने अपना बलिदान दिया है और उसी सियाचिन को सोनिया गाँधी की सरकार पाकिस्तान को सौंप देना चाहती थी

दरअसल सोनिया गाँधी ने किसी तरह भारत की सत्ता पर 2004 में कब्ज़ा कर लिया, उसके बाद पाकिस्तान-अमेरिका की एक लॉबी एक्टिव हो गयी और भारत की की सोनिया सरकार ने कथित शांति के लिए सियाचिन को पाकिस्तान को सौंप देने का मन बना लिया

पाकिस्तान के साथ बैठक होनी थी और रिमोट कण्ट्रोल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बैठक में डील साइन करने वाले थे जिसके बाद सियाचिन पाकिस्तान को सौंप दिया जाता और कथित शांति आ जाती

पर भारतीय सेना अपनी पे आ गयी और सोनिया गाँधी ने मनसूबे पर पानी फेर दिया, उस समय आर्मी चेइफ़ थे जेजे सिंह, वो साल 2007 तक भारतीय सेना के अध्यक्ष रहे



जेजे सिंह ने  खुलासा किया की तत्कालीन सरकार भारतीय सेना को कह रही थी की वो सियाचिन ग्लेशियर को खाली कर दे, सरकार सियाचिन ग्लेशियर को पाकिस्तान को सौंप देना चाहती थी

जेजे सिंह ने बताया की सेना ने इसका विरोध किया, क्यूंकि अगर हम ऐसा करते तो पाकिस्तान कई टॉप के अहम् पोजीशन पर कब्ज़ा कर लेता और भारतीय सेना के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती और पुरे देश को शर्मिन्दा होना पड़ता, सियाचिन ग्लेशियर से भारतीय सेना के हटते ही उसपर पाकिस्तानी सेना आ जाती और फिर नीचे के कई इलाकों पर भी बड़ी आसानी से पाकिस्तानी कब्ज़ा हो जाता और देश शर्मिंदा हो जाता


पूर्व आर्मी चीफ ने बताया की बताया की सोनिया सरकार की मांग को सेना ने ठुकरा दिया, सेना ने उस समय अहम् स्टैंड लिया और सेना अपनी पे आ गई और इसी कारण सियाचिन ग्लेशियर बचा, अन्यथा सोनिया गाँधी इसे पाकिस्तान को सौंपने की पूरी तैयारी कर चुकी थी full-width