जीवन भर खुद को बताया आदिवासी, आरक्षण भी खाया, पर मरने पर निकले ईसाई



अजित जोगी एक आईएएस अफसर थे, आरक्षण के जरिये नौकरी प्राप्त की थी, खुद को ST यानि आदिवासी बताकर आरक्षण खाया, बाद में कांग्रेस के नेता बन गए और जब छत्तीसगढ़ राज्य बना तो कांग्रेस के पहले मुख्यमंत्री बने

जीवन भर अजित जोगी ने खुद को आदिवासी बताया और आदिवासियों की राजनीती की, ये जीवन भर अजित नाम का इस्तेमाल करते रहे जो की संस्कृत से निकला हिन्दू नाम है, ये जोगी सरनेम का इस्तेमाल करते रहे, ये भी संस्कृत से निकला हिन्दू सरनेम है 

इन्होने अपने बच्चों का नाम भी रेनू और अमित रखा, ये दोनों भी संस्कृति से निकले हिन्दू नाम है, इन नामो में इनको कौन पहचान सका ? कोई नहीं 

अजित जोगी जो खुद को आदिवासी बताते थे, जिन्होंने आरक्षण भी खाया, वो आरक्षण जो आदिवासियों के लिए है वो मरने के बाद ईसाई निकले 

अजित जोगी का अंतिम संस्कार किसी आदिवासी तरीके से नहीं किया गया बल्कि उनका अंतिम संस्कार ईसाइयत के तरीके से किया गया और उनकी कब्र पर अब क्रॉस भी बनाया गया है, देखिये 


अजित जोगी की कब्र, ईसाइयत के हिसाब से 



कब्र पर अब क्रॉस, ईसाइयत के हिसाब से 

भारत में कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है, धर्मांतरण की भी यहाँ क़ानूनी आज़ादी है, पर जीवन भर खुद को आदिवासी बताया, हिन्दू नामो का इस्तेमाल किया, आदिवासियों के लिए दिया गया आरक्षण भी खाया और आईएएस बने और मरने के बाद निकले ईसाई 


यहाँ आपको बता दें की ईसाइयत एक विदेशी मजहब है, और आदिवासी ईसाई नहीं होते full-width