डोवाल ने बनाया चक्रव्यूह, जिसमे फंसा रियाज नाइकू, फिर चीर के रख दिया इसे सेना ने



इस्लामी आतंकी रियाज नाइकू अब जहन्नुम में पहुँच चूका है, सेना को इस आतंकी की तलाश काफी लम्बे समय से थी और ये कम से कम 4 बार भागने में कामयाब रहा था 

रियाज नाइकू की सबसे बड़ी ताकत कश्मीर में स्थानीय मजहबी उन्मादी थे जो इसे छिपने, इसे शरण देने में पूरा समर्थन करते थे 

काफी दिनों से इसकी तलाश जारी थी और इसके लिए स्वयं NSA अजित डोवाल ने चक्रव्यूह बनाया था, उन्होंने इसके लिए ऑपरेशन जैकबूट को शुरू किया था और इसी ऑपरेशन के तहत आतंकी रियाज नाइकू को सेना ने चीर के रख दिया 

जानकारी के मुताबिक, एनएसए अजित डोभाल ने घाटी में आतंक फैलाने वाले बड़े आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जैकबूट शुरू किया था। इसे उस समय लॉन्च किया था, जब जम्‍मू और कश्‍मीर के पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग और शोपियाँ में आतंकियों की ओर से ‘आजाद इलाका’ घोषित किया जाने लगा था। इसमें बुरहान वानी के ग्रुप में कई कश्मीरी आतंकी शामिल थे। इन सभी ने मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने की साजिश रचनी शुरू कर दी थी।

बता दें इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे अजित डोभाल के वो ‘डोभाल ऐसेट्स’ काम आए। जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी जानकारी सेना के जवानों तक को नहीं होती है। वह डोभाल को खुफिया जानकारी मुहैया कराते हैं। अजीत ने जैकबूट-1 और जैकबूट-2 में शामिल अधिकारियों को खुद चिह्नित किया था। सेना में यह बात चलन में है कि ऐसे लोगों को डोभाल के ऑख और कान कहा जाता है। इन्हीं की मदद से डोभाल ने ऑपरेशन को पूरा किया है।

11 जनवरी 2020 ऑपरेशन जैकबूट-2 के तहत श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर डीएसपी देवेंद्र सिंह के साथ हिजबुल के मोस्टवांटेड आतंकी नवीद बाबू को गिरफ्तार किया गया। उसी महीने 25 जनवरी को पुलवामा का मुख्य साजिशकर्ता जैश कमांडर कारी यासिर त्राल में अपने दो अन्य साथियों संग मारा गया था।

पुलवामा हमले के बाद ऑपरेशन जैकबूट लाया गया। इसमें खास कमांडरों को टारगेट करने का लक्ष्य रखा गया। जैकबूट के पहले चरण में करीब 104 आतंकियों को मार गिराया गया था। जैकबूट-1 के दौरान 2014-16 या इससे पहले सक्रिय हुए सभी मोस्ट वांटेड आतंकी कमांडर मारे गए थे। और कुछ पाकिस्तान भाग गए थे।

वहीं रियाज नाइकू एंड कंपनी अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद दूसरे राज्य के श्रमिकों, ट्रक चालकों और सेब व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे। आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के चार जिले पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग और शोपियां को आजाद घोषित कर दिया था। जिसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उन जगहों का दौरा कर ऑपरेशन जैकबूट की नींव डाली।

जैकबूट-2 में दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को दो वर्गों में रखा गया। पहले वर्ग में उन लोगों को रखा जो पूरे दक्षिण कश्मीर में सोशल मीडिया के जरिए आतंकी गतिविधियाँ चला रहे थे। दूसरे वर्ग में वो लोग शामिल थे जो कमांडरों के आदेश पर वारदात अंजाम दे रहे थे और अपने-अपने इलाके में पोस्टर ब्वाय बन रहे थे। और इसी के तहत त्राल में हमादखान, बुरहान कोका, आसिफ और लतीफ दास जैसे आतंकियों को मार गिराया गया था।

बुरहान वानी गैंग के सफाए के बाद रियाज नायकू मोस्ट वांटेड बन चुका था। उसे पकड़ने के लिए काफी कोशिशें की गई। पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को भी नष्ट किया गया। ताकि वह छुपने की अलग जगह ढूँढे। और फिर ठिकाने नष्ट होने के बाद वह अपने गाँव अपने परिवार से मिलने गया और यहीं वह जाल में फँस गया।

आमतौर पर कश्मीरी अपने घर का बेकार समान छत पर ही रखते हैं। इसीलिए लोगों को शक न हो, नाइकू ने छुपने के लिए रिश्तेदार की छत के नीचे अपना ठिकाना बनाया था। जहाँ से वो आस-पास के घरों और गलियों पर आसानी से निगाह रख सके। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि हम छह माह से रियाज नाइकू के पीछे पड़े हुए थे। full-width