जानिये कैसे इंसान से शैतान बन गए चीनी ? वामपंथियों ने बना दिया जानवरखोर, पहले ऐसे नहीं थे चीनी



चीन के लोग अब शैतानो की तरह बर्ताव क्यों करते है, वो जानवरों को दरिन्दे तरीके से क्यों खाते है, आखिर वो इतने दुर्दांत क्यों बन चुके है, ये सवाल आपके मन में अक्सर आता होगा, क्या चीनी हमेशा ऐसे ही थे या हाल ही में वो ऐसा बने है वो आपको जानना चाहिए 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की पहले चीनी इस तरह के नहीं थे, वो भारतीय और अन्य लोगो की तरह के ही थे, वहां जानवरों को दरिन्दे तरीके से खाने की कोई परंपरा नहीं थी, पर तभी चीनी नेता माओ सत्ता में आया 

चीन की आज़ादी के बाद माओ के पास ही चीन की सत्ता थी और माओ ने चीन को एक वामपंथी देश बनाने का निर्णय किया, वो लोगो के मन में लोकतांत्रिक देशों के प्रति नफरत भरना चाहता था ताकि लोगो को वामपंथ ही अच्छा लगे न की लोकतंत्र


इसके लिए माओ ने चीनी लोगो को चिड़ियों से नफरत करना सिखाया, माओ और उसकी सरकार ने ये प्रचार किया की चिड़िया भ्रष्ट्र होती है वो हमेशा भूखी रहती है, वो सबकुछ खा जाना चाहती है, माओ ने चिड़िया को पश्चिमी देशों का प्रतिक बताया और उसकी पूरी पार्टी ने चिड़ियों के प्रति नफरत फैलाई, सबसे ज्यादा नफरत गौरया के खिलाफ फैलाई गई


चीनी सरकार के इस प्रोपगंडा के चलते चीन के लोगो ने चिड़ियों को घरों से भागना शुरू कर दिया, घरों में बने घोंसले तोड़े गए, ये प्रोपगंडा और बढ़ता ही गया और चीनी लोगो ने आसपास के पेड़ों, जंगलों में भी चिड़ियों को बड़े पैमाने पर मारना शुरू कर दिया, चिड़ियों को पश्चिमी देशों के प्रतिक के रूप में देखा गया, और इतने बड़े पैमाने पर चिड़ियों को चीन में मारा गया की कई चिड़ियों की प्रजाति तो चीन से विलुप्त ही हो गयी 


बड़े पैमाने पर वामपंथी पार्टी के कार्यकर्त्ता सामूहिक तौर पर निकलते और इलाके की सभी चिड़ियों को गुलेल बन्दुक से शिकार बनाते, घोंसले तोड़कर अंडे फोड़ दिए जाते, और हर शहर में ज्यादा से ज्यादा चिड़ियों को मारने के लिए इनाम की घोषणा भी की जाती थी 


बच्चों से लेकर बड़ो तक ने चिड़ियों को मारा और चिड़ियों को मारना वहां गर्व की बात बन गयी, इस सामूहिक कत्लेआम से चीन में चिड़ियों की बहुत कमी हो गयी, जिसके बाद एको सिस्टम में भी गड़बड़ी शुरू हो गयी 

दरअसल चिड़ियों के न होने से बड़े पैमाने पर कीट की संख्या बढ़ गयी, चिड़ियाँ कीटों को खाती है पर चिड़ियाँ न होने से कीटों की संख्या बढ़ गयी और कीटों ने चीन के किसानो पर कहर बरपा दिया, उस समय इतनी दवाइयां थी नहीं और कीटों ने किसानो के खेत बर्बाद कर दिए, किसान फसलें लगाते पर कीट उन फसलों को खा जाते 

ऐसा कोहराम मचा की चीन में बड़े पैमाने पर भुखमरी शुरू हो गयी, और इस भुखमरी में 2 करोड़ लोगो की मौत हो गयी, हालात इतने ख़राब हो गए की लोगो ने जानवरों को खाना शुरू कर दिया, चूहे, चमगादड़, चिड़िया, कीड़े, सांप, चीनी लोगो को जो मिलता वो उसे खाते, हालत इतने बुरे थे की चीनी लोगो ने इन्सान की लाश को भी खाना शुरू कर दिया, काफी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा 

धीरे धीरे चीन के हालात तो सुधर गए पर लोगो ने इतने लम्बे समय तक सभी प्रकार के जानवरों को खाया की चीनी लोगो के खान पान वाली हैबिट में ही जानवरों को खाना आ गया, और ये बढ़ता गया बढ़ता गया, और आज हालात ये है की आज चीन में दरिन्दे की तरह जानवरों को खाया जाता है

चीनी जनता में ये दरिंदगी कम्युनिस्ट पार्टी की देन है, माओ की देन है, ये शैतानियत वामपंथ की जड़ है, चीनी लोग नहीं बल्कि वामपंथी पार्टी और वामपंथी विचारधारा शैतान की विचारधारा है जिसने दुनिया में सिर्फ दरिंदगी और आतंक फैलाया है, इस्लामिक आतंकवाद और वामपंथ ने ही दुनिया में सबसे ज्यादा खून ख़राबा किया है और शैतानियत सिखाई है