कोरोना संकट - मंदिरों ने करोडो का दान दिया, गुरुद्वारों ने खाना, मस्जिद-चर्च कब आएंगे काम ?



कहने को देश सबका है और हिस्सेदारी सबकी है, पर जब भी देश में आपदा आती है, देश पर कोई संकट आता है तब मंदिर और गुरूद्वारे तो देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाते नजर आते है पर मस्जिदें और चर्च संकट काल में देश के कभी काम नहीं आते

देश में फ़िलहाल कोरोना संकट चल रहा है, इस संकट काल में तरह तरह के लोग सरकार और लोगो की मदद कर रहे है, देश के मंदिरों ने अबतक करोडो का दान प्रधानमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया है

कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार है जिन्होंने दान दिया है


विभिन्न हिन्दू मंदिरों ने कोरोना से लड़ने के लिए करोडो का दान किया है, मंदिरों के अलावा गुरूद्वारे भी अहम् भूमिका निभा रहे है, कई शहरों में गुरुद्वारों द्वारा लोगो के लिए खाना और रहने टहरने का इन्तेजाम किया गया है 

पर बड़ा सवाल ये उठता है की रेलवे के बाद सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी दबाये बैठे चर्च कहाँ है ? और वक्फ बोर्ड के जरिये अकूत प्रॉपर्टी के मालिक मस्जिदें कहा है ?

जब देश पर संकट आता है तो मंदिर और गुरूद्वारे तो देश के काम आते है पर सवाल ये ही पुछा जाना चाहिए की संकट काल में चर्च और मस्जिद कहाँ रह जाते है

क्या कोई मस्जिद दान दे रहा है ? क्या कोई दरगाह कोई पीर बाबा दान दे रहा है ? क्या कोई चर्च लोगो को खाना और रहने के लिए जगह दे रहा है ? मंदिर और गुरूद्वारे तो अपना कर्तव्य निभा रहे है, इस देश में मस्जिदें और चर्च संकट के समय क्या कर रही है ?