जल बोर्ड के बाद DTC बर्बाद, दिल्ली का राजकीय घाटा 55 गुना बढ़ा, मुफ्त की स्कीमो से अर्थव्यवस्था का बुरा हाल



दिल्ली की आर्थिक स्तिथि और सरकारी कंपनियों की स्तिथि दिन प्रति दिन ख़राब होती जा रही है, जल बोर्ड जो की पहले फायदे में चलने वाली कंपनी थी वो अब 800 करोड़ के घाटे में चलने वाली कंपनी बन चुकी है, दिल्ली जल बोर्ड की स्तिथि ये है की कंपनी के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के प्रयाप्त पैसे नहीं है 

जल बोर्ड के बाद अब डीटीसी जो की दिल्ली में बस सर्विस देती है वो भी फायदे से घाटे वाली कंपनी बन चुकी है, डीटीसी को अब 1750.37 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है, ये घाटे में चलने वाली कंपनी बन चुकी है, इसी कारण नए बस भी नहीं ख़रीदे जा रहे है और पिछले 5 सालों में दिल्ली में 1 हज़ार बस कम हो चुके है 

दिल्ली का राजकीय घाटा भी बढ़ चूका है, वर्ष 2019-20 में पेश किए गए दिल्ली बजट में 5,902 करोड़ रुपए का राजकीय घाटा अनुमानित है जो वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमान से 5,213 करोड़ रुपए अधिक है। यानि दिल्ली का राजकीय घाटा 55 गुना बढ़ चूका है 

एक के बाद एक कम्पनियाँ फायदे से घाटे वाली कम्पनियाँ बन रही है और इसका कारण ये है की इन कंपनियों की आय नहीं हो पा रही है पर खर्चे करने पड़ रहे है 

दिल्ली जल बोर्ड और डीटीसी के बाद अब दिल्ली में मुफ्त की बिजली स्कीमो के चलते जल्द ही बिजली कम्पनियाँ भी घाटे की कम्पनियाँ बनने वाली है 

जिस तरह दिल्ली में मुफ्त की स्कीमें चल रही है, अंदेशा है की अगले 10 सालों में दिल्ली की जीडीपी ग्रोथ नेगेटिव हो जाएगी और दिल्ली में अराजकता का माहौल बन जायेगा, ऐसे ही हालात वेनेज़ुएला और जिम्बाबे जैसे देशों में चल रही है