ट्रम्प के सामने देश को बदनाम करने के लिए केजरीवाल गिरोह ने लगाई ताकत, बेशर्मी पर उतरे गद्दार



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे की खबर सुनने के बाद से देश का लिबरल गिरोह हैरान-परेशान है। अपनी सारी युक्तियाँ लगाकर ये गिरोह इस समय डोनॉल्ड ट्रंप के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के साथ देश की छवि मटियामेट करना चाहता है। अभी पिछले दिनों अपनी मूढ़ता का परिचय देते हुए इस कड़ी में एक प्रयास अतुल खत्री ने किया था। मगर अब कुछ और मूर्खों की लिस्ट निकलकर सामने आई है।

दरअसल, डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक कुछ दिन पहले एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। तस्वीर में दिखाया जा रहा है कि जिन दीवारों पर ट्रंप के स्वागत के लिए उनके पोस्टर बने हुए हैं, वहाँ तो भारतीय लोग पेशाब करके जा रहे हैं।

इस तस्वीर को 38 हजार फॉलोवर्स वाली आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम की इंचार्ज एश्वरी वर्मा ने भी शेयर किया है। साथ ही 20 हजार फॉलोवर्स वाले फिल्म निर्देशक और पत्रकार अविनाश दास ने भी शेयर किया है।

अब हालाँकि, ये गिरोह कितना ही खुद को चालाक समझे, लेकिन जरा सी गलती के कारण इसे हर बार अपनी फजीहत करवानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ। क्योंकि जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर डालकर ट्रंप के सामने भारत की बदनामी करने कोशिश हो रही थी, वो डॉक्टर्ड निकली। अब इस बात की पुष्टि कैसे होती है। आइए समझते हैं…

दरअसल, लिबरल गिरोह जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करके मजे ले रहा है। उस तस्वीर में एक व्यक्ति दीवार पर पेशाब करता दिख रहा, दीवार पर साइड में नरेंद्र मोदी और डोनॉल्ड ट्रंप की तस्वीर है और रास्ते से एक युवक अपनी बाइक लेकर जा रहा है।

अब हालाँकि, एक नजर में कोई भी इस फोटो के झूठ को कैप्शन देखकर सच मान लेगा। लेकिन उसी समय की वास्तविक तस्वीर को देखा जाए तो, पता चलेगा कि गिरोह का प्रोपगेंडा 10 मिनट से ज़्यादा नहीं चल पाता। याद ही होगा कि जामिया लाइब्रेरी के वीडियो का प्रपंच कितने मिनट में फुस्स हो गया था।

मोदी-ट्रंप के पोस्टर के रूप में भारत-अमेरीका के रिश्ते को दर्शाने के लिए तैयार की गई इस दीवार पर रिपोर्ट हुई थी। जिसमें वही तस्वीर बतौर फीचर इमेज इस्तेमाल की गई। तस्वीर में वही कड़ाके की दोपहर थी, हरे रंग की दीवार पर ट्रंप-मोदी का पोस्टर था। साथ ही वो वहीं बाइक वाला व्यक्ति भी था, जिसे डॉक्टर्ड फोटो में क्रॉप करके आधा दिखाया गया। लेकिन, इसमें वो शख्स गायब था, जो दीवार पर पेशाब कर रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे तो वहाँ तकनीक का इस्तेमाल करके जोड़ा गया था।

इसके अलावा, बता दें सच्चाई का पता बिना असली फोटो को देखे भी लगाया जा सकता है, क्योंकि डॉक्टर्ड तस्वीर में पेशाब कर रहे व्यक्ति को ध्यान से देखा जाए तो मालूम चलेगा कि उसके साइड में मौजूद पेड़ की छाया, जमीन पर साफ दिख रही है, लेकिन व्यक्ति की कोई छाया नज़र नहीं आ रही।

जाहिर है, कि नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए ये तस्वीर गढ़ी गई और बिना जाँच-परख किए अपने ट्विटर से इसे शेयर करने वालों ने भी अपने हजारों की संख्या में फॉलोवर्स को झूठ परोसा। साथ ही सार्वजनिक रूप से अपनी कुंठा निकालने के लिए देश को बदनाम करने का भरपूर प्रयास हुआ।