शाहीनबाग़ की 'शेरनियां' अब हुई पस्त, रस्ते खुले, 'शेरनियों' ने मैदान छोड़ना किया शुरू, बिरयानी भी मिलना बंद



शाहीन बाग़ की शेरनियां अब पस्त हो चुकी है, वो अब थक चुकी है, उनमे अब जान नहीं बची इसी कारण 90% शेरनियां अब शाहीन बाग़ में मैदान छोड़ चुकी है, शाहीन बाग़ में अब बिरयानी मिलनी भी बंद हो चुकी है 

CAA को लेकर मजहबी उन्मादियों ने दिल्ली के शाहीन बाग़ में 15 दिसंबर 2019 से ही उन्माद मचाना शुरू किया, इनका उन्माद काफी दिनों तक चला, इनकी मंशा थी की ये सरकार को झुका देंगे और मोदी सरकार CAA पर पीछे हट जाएगी 

मजहबी उन्मादियों ने एक से बढ़कर एक हरकतें की, हिन्दुओ को ख़त्म करने की धमकियाँ दी गयी, देश को काटने की प्लानिंग की गयी, एक से बढ़कर एक प्रोपगंडा किये गए, और जमकर जहर उगला गया 

बिरयानी भी खूब बांटी गयी इसके अलावा पैसे का भी खूब खेल हुआ, देश और दुनिया ने बहुत कुछ देखा, मजहबी उन्मादियों ने सरकार को झुकाने के लिए पूरी ताकत लगा दी, पर सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा 

अब आखिर कितने दिन तक बिरयानी मिलती, दिल्ली के तो चुनाव भी ख़त्म हो गए, मजहबी उन्मादी कहते थे की जबतक सरकार CAA वापस नहीं लेगी तब तक वो शाहीन बाग़ से हिलेंगे नहीं 

मजहबी उन्मादियों ने बैठी हुई औरतों को शेरनी बताना शुरू कर दिया, पर अब हाल ये है की सरकार ने इन उन्मादियों को कोई भाव ही नहीं दिया, और अब शेरनियां पस्त हो गयी, 90% शेरनियां अब आती ही नहीं, वो मैदान छोड़ चुकी है और शाहीन बाग़ की सडकें जो उन्मादियों ने बंद करके रखा था, अब अधिकांश सडकें भी खुल चुकी है 

90% शेरनियां अब मैदान छोड़कर भाग चुकी है, CAA पर सरकार ने इनकी 1% बात भी नहीं सुनी, सरकार अपने स्टैंड पर कायम है, पर शेरनियां मैदान से गायब हो चुकी है, और अब सडकें भी खुल चुकी है, बिरयानी की सप्लाई भी बंद, अब जल्द ही बाकि बचे 10% भी गायब हो जाएँगे और शाहीन बाग़ का तमाशा बंद होगा