ये है मुगलों को कई युद्ध हराने वाली शिवाजी महाराज की पुत्रवधू का समाधी स्थल, हमे आतंकवादी मुगलों के स्मारकों से फुर्सत मिले तब तो



भले ही 6 साल से देश में मोदी सरकार हो पर इस देश में अभी भी बहुत सारे विभागों में मुगलिया सेक्युलर मानसिकता ही चल रही है और ऐसे विभागों में ASI भी शामिल है जिसका काम है देश के ऐतहासिक स्थलों का रख रखाव करना

हर साल करोडो का बजट बंटा है और ASI को सौंपा जाता है, अभी हाल ही में दिल्ली में औरगंजेब ने जिस स्थान पर मुग़ल शासक बना था, ASI ने उस स्थल पर करोडो रुपए खर्च करके उसे नए सिरे से चमकाने का प्लान बनाया है

देश की जनता के टैक्स के पैसे से ASI बड़े पैमाने पर मुग़ल, इस्लामिक स्मारकों का रख रखाव करता है, पानी  की तरह पैसा बहाया जाता है, पर जिन महापुरुषों और महा स्त्रियों ने इस देश की अस्मिता के लिए संघर्ष किया, युद्ध जीते उनकी क्या स्तिथि है ये आपको देखना चाहिए

शिवाजी महाराज की पुत्रवधु थी रानी ताराबाई, शिवाजी महाराज के स्वर्ग सिधारने के बाद स्वयं ताराबाई ने मुगलों के खिलाफ कई युद्ध लड़ा था, वो स्वयं युद्ध भूमि में जाकर युद्ध करती थी और उन्होंने मुगलों से कई इलाके छीने थे और उन्हें इस्लामिक आतंकवादियों से स्वतंत्रता दिलाई थी

आज महारानी ताराबाई के समाधी स्थल की स्तिथि क्या है ये आपको आँखें खोलकर देखना चाहिए


ये समाधी स्थल महाराष्ट्र के सतारा जिले के महौली में बना हुआ है, इसकी स्तिथि आप देख सकते है, ये समाधी स्थल है या क्या है ये भी समझना मुश्किल है, यहाँ पर महारानी ताराबाई का नाम लिखा हुआ है सिर्फ उसी से पहचान होती है की ये उनकी समाधी स्थली है 

ये हाल है शिवाजी महाराज की पुत्रवधु का जो की स्वयं एक योद्धा थी और उन्होंने कई युद्ध लड़े थे, ASI जैसी हमारी संस्थानों को मुग़ल आतंकवादियों से फुर्सत मिले तब तो जाकर भारतीय महापुरुषों और महा स्त्रियों को सम्मान मिलेगा, सेकुलरिज्म इस तरह हावी है की औरंगजेब की कब्र पर करोडो रुपए खर्च करने के लिए है पर महारानी ताराबाई के समाधी स्थल के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं