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जय श्री राम के नारे को कम्युनल बताने वाली मायावती ने अपनी पार्टी के नारे में जोड़ा "खुदा हाफिज" का नारा

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भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा जयश्रीराम के पावन उद्घोष को सांप्रदायिक बताने वाले इस नारे पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं. किसी की ये हिम्मत नहीं हो पा रही हैं कि वो राजनीति में खुदा हाफिज के नारे को उसी तरह कम्यूनल बता सकें, जिस तरह वो जयश्रीराम या वन्देमातरम को बताते आये है. लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी सरकार की दोबारा से बंपर जीत के बाद विपक्षी पार्टियाँ सकते में हैं तथा अपना राजनैतिक वजूद बनाये रखने के तमाम जतन कर रही हैं.

हम बात कर रहे हैं मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी की, जिन्होंने यूपी उपचुनावों के लिए अपने राजनैतिक नारे में खुदा हाफिज शब्द भी जोड़ा है, ताकि मुस्लिम वोटबैंक को मजबूत किया जा सके. बता दें उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियों ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. सीएम योगी आदित्यनाथ भी मंत्रियों के साथ बैठक कर लगातार यह योजना बना रहे हैं कि कैसे जनता को अपनी तरफ आकर्षित किया जाए. योगी ने विधानसभा की सीटों का उत्तरदायित्व संभाले मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई काम अधूरा नहीं रहना चाहिए जिससे हार का सामना करना पड़े.

वहीं दूसरी तरफ विपक्षी बसपा भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. लोकसभा चुनाव सपा के साथ लड़ने वाली बसपा अब सपा के साथ गठबंधन तोड़कर अकेले ही उपचुनाव लड़ रही है. मुस्लिम समुदाय का वोट साधने के लिए इस बार बसपा ने अपना नारा भी बदल लिया है। इस बार पार्टी द्वारा जय भीम, जय भारत के साथ अब ‘खुदा हाफिज’ भी बोला जा रहा है. अभी तक बसपा जय भीम जय भारत के अलावा काशीराम के नारे का ही प्रयोग करती थी.

बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को पीछे छोड़ते हुए बसपा ने जिस रणनीति के तहत ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया है उसे देखते हुए पार्टी अब यह कहने में जुट गई है कि मुस्लिम समाज पूरी तरह से बसपा के साथ है.वहीं बुरी तरह से पराजित होने वाली कांग्रेस अभी भी अपना वजूद तलाशने में जुटी है. सपा में बिखराव की दशा में बसपा मुस्लिम वोटरों के बीच नई रणनीति के तहत काम करने में जुटी है. मुस्लिम वोटबैंक को साधने की अपनी इसी रणनीति के तहत बसपा उपचुनावों में “जय भीम जय भारत खुदा हाफिज” के नारे के साथ उतरेगी
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