जिस इरफ़ान हबीब को सेक्युलर इतिहासकार बताकर पढाई जाती थी स्कूलों में इसकी किताबें, दिखा ही दिया उसने अपने अन्दर भरा हुआ जहर


अगर आप इरफ़ान हबीब को ठीक से नहीं जानते तो आपको बता दें की ये वो शख्स है जिसे सेक्युलर बताकर भारत के स्कुल कॉलेज में इसकी इतिहास की किताबें पढाई जाती है, अब इसी इरफ़ान हबीब ने जिसे सेक्युलर इतिहासकार बताया जाता है इसने जहर उगला है 

इरफ़ान हबीब ने दिखा दिया की उसके अन्दर कितना जहर है, उसके जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने का विरोध किया है और उसके विरोध में अपना असल रुप, असल जहर दिखाया है 

87 वर्षीय इतिहासकार इरफ़ान हबीब  ने दावा किया है कि – संघ परिवार के लोग कश्मीरी मुसलमानों का उत्पीड़न करते थे, उनपर हमले करते थे और उनकी जमीने छीन लेते थे. इसलिए सरदार पटेल कश्मीर में परमिट सिस्टम पर राजी हुए ताकि बाहरी लोगों को कश्मीरी लोगों की जमीने छीनने से रोक सकें. इरफ़ान हबीब ने कहा है कि जब संघ परिवार के लोगों ने कश्मीर के लोगों पर हमले करना शुरू किया, उनकी जमीनें छीनना शुरू कर दिया, इसलिए वहां 370 लगाई गई थी.

इरफ़ान हबीब ने कहा जब कश्मीर के राजा ने भारत के साथ आने का फैसला किया तो उस वक्त संघ परिवार ने कश्मीर के मुसलमानों पर हमले करना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा, ‘संघ के सदस्य स्थानीय मुसलमानों का उत्पीड़न करने लगे थे और उनकी जमीनें छीन लीं. यही कारण था कि सरदार पटेल (कश्मीर में एंट्री के लिए) परमिट सिस्टम के लिए राजी हुए ताकि बाहरियों को स्थानीय लोगों की जमीनें हथियाने से रोका जा सके.’ इरफान हबीब के अनुसार इसके बाद भी देश के लोगों को कश्मीर जाने के लिए आसानी से परमिट मिल जाता था. साथ ही कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं को वहां जाने से रोका गया , क्योंकि उनकी नीयत ठीक नहीं थी.

इरफ़ान हबीब की उम्र 87 वर्ष है और ऐसा लगता है कि उनका दिमागी संतुलन बिगड़ चूका है. आज तक एक भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं है कि संघ ने किसी की जमीन कब्जाई हो. लेकिन इरफ़ान हबीब के अनुसार वो कश्मीर पहुँच गए कश्मीरियों की जमीनें कब्जाने. लेकिन इरफ़ान ये नहीं बताते कश्मीरी के जिहादी उन्मादियों ने बन्दूक और हिंसा के बल पर कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से भगा कर पुरे कश्मीर पर कब्ज़ा कर लिया, उनकी बहन बेटियों से बलात्कार किया, बजाय इसके वह संघ परिवार पर आरोप लगा रहे हैं.

बुढापे में इरफ़ान हबीब इस दावे से समझा जा सकता है कि जवानी में उन्होंने कैसा जहरीला इतिहास लिखा होगा. इरफ़ान हबीब आरएसएस के घनघोर विरोधी है. साल 2015 में इरफ़ान ने आरएसएस की तुलना इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS से करते हुए कहा था -“राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और इस्लामिक स्टेट में बौद्धिक आधार पर ज्यादा अंतर नहीं है.” इरफ़ान को अपने इस मानसिक दिवालियापन के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. कई वरिष्ठ लोगों ने इरफ़ान को सलाह दी थी कि अब उन्हें इतिहास लिखना छोड़ देना चाहिए. इसके अलावा इरफ़ान हबीब ने भारत माता की जय कहने पर भी सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि भारतीय इतिहास में मातृभूमि का कोई जिक्र नहीं है ये विचार यूरोप का है
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