मर्द के लिए 72 हूर, औरत के लिए कुछ भी नहीं? यह इंसानियत है या जाहिलियत : अश्विनी उपाध्याय


अक्सर मजहबी उन्मादी लोगो को आतंकवादी बनाने के लिए जन्नत, हूर, गिलमा, शराबी नदी का लालच देते है, कहते है की अल्लाह के लिए जिहाद करो तो जन्नत मिल जायेगा 

हूर, गिलमा, शराबी नदी के लालच में ही मजहबी उन्मादी आतंकी बनते है, यहाँ वहां आतंकी हमले करते है और दुनिया की शांति को भंग करते है 

पर ये सवाल भी अक्सर पुछा जाता है की आखिर मर्द को 72 हूर मिलती है तो फिर औरतों को क्या मिलता है, अगर कोई औरत जिहाद करे तो उसे क्या मिलेगा 

इस सवाल का कोई सीधा जवाब तो नहीं देता इसलिए बार बार ये सवाल उठता ही रहता है 

सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी इसी सवाल को उठाया, और इसके साथ साथ उन्होंने और भी सवालो को उठाया जिनके जवाब मिलना जरुरी है 

हुआ ये की अरफा खानुम नाम की मजहबी उन्मादी कश्मीर और धारा 370 पर लोगो को गोल मोल करने की कोशिश कर रही थी, उसी अरफा खानुम से सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने सवाल जवाब पूछ लिया, जिसका अबतक अरफा खानुम ने कोई जवाब नहीं दिया है 
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