भारत का जबरजस्त लाभ, फ्रांस ने और 36 राफेल बेचने की पेशकश की वो भी पिछली डील से कम कीमत पर


राफेल डील की शुरुवात असल में सोनिया गाँधी की कांग्रेस सरकार के समय ही हुआ, पर उस सरकार ने घोटालों के अलावा कुछ नहीं किया और राफेल पर कोई काम नहीं हुआ 

मोदी सरकार आई तो डील को पूरा किया और भारत ने 36 राफेल जेट्स का सौदा किया, वो भी एकदम फुल्ली लोडेड, यानि 36 जेट आयेंगे जो सीधे लड़ाई पर जाने के लिए रेडी होंगे, हथियारों सहित 

भारत ने 36 जेट्स का सौदा 7.9 बिलियन यूरो में किया है, भारत को पहला फाइटर जेट सितम्बर 2019 में मिलेगा, भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वायु सेना प्रमुख धनोआ फ्रांस जायेंगे और पहली डिलीवरी लेंगे 

अब नरेंद्र मोदी भी फ़्रांस की यात्रा पर जाने वाले है और इस से पहले भारत को जबरजस्त सफलता हांसिल हुई है, फ्रांस के साथ पहली डील 36 जेट्स की थी 7.9 बिलियन यूरो में 

अब फ्रांस ने भारत को और 36 जेट्स बेचने की पेशकश की है और इस बार कीमत 6 बिलियन यूरो ही रखी गयी है, यानि पिछली डील से भी काफी सस्ती 

फ़्रांस का कहना है की भारत की वायु सेना उसकी पुरानी कस्टमर है, भारतीय वायु सेना मिराज नामक जेट उडाती है जो की फ़्रांस का ही है, इसी जेट का इस्तेमाल भारतीय सेना ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय भी किया था 

फ़्रांस अब भारत को और 36 राफेल सिर्फ 6 बिलियन यूरो में देने को तैयार है, देखना ये होगा की भारत सरकार फ़्रांस की पेशकश के बाद अब क्या नया फैसला लेती है 

बता दें की राफेल जेट काफी उन्नत है और इसकी सबसे बड़ी क्षमता तो ये है की इसमें ऐसे मिसाइल दागने की तकनीक है की इसे पाकिस्तान में काफी अन्दर तक टारगेट करना होगा तो इसे पाकिस्तानी सीमा में जाने की भी जरुरत नहीं, ये भारतीय एयर स्पेस से ही पाकिस्तान में टारगेट्स को दाग सकता है 

राफेल जेट्स की डिलीवरी के बाद भारतीय वायु सेना की ताकत काफी घातक हो जाएगी, पाकिस्तान और चीन इसी से काफी परेशान भी है इसी कारण राफेल डील को रद्द करवाने के लिए पाक चीन ने भारत में अपने दलालों का इस्तेमाल किया था, दलालों ने भी राफेल डील के खिलाफ काफी शोर मचाया, ताकि डील रद्द हो जाये, पर ऐसा हो न सका और दलालों के साथ साथ चीन पाकिस्तान के मंसूबों पर भी पानी फिर गया