जावेद अख्तर का काला इतिहास, बाप दादा थे अंग्रेजो के चाटुकार, और परदादा मजहबी उन्मादी


जावेद अख्तर जो खुद को एक नास्तिक, सेक्युलर व्यक्ति बताते है वो इन दिनों काफी बौखलाए हुए है, असल में सोशल मीडिया पर आये दिन जावेद अख्तर की असलियत को आम लोग सामने रख देते है और इस से बौखलाकर जावेद अख्तर एकदम आग बबूला ही हो जाते है 

इनकी बेगम पिछले कई दिनों से नरेंद्र मोदी की सरकार पर हमले कर रही है, इसे लेकर कुछ लोगो ने इनपर कटाक्ष भी कर दिया जिस से जावेद अख्तर इतना बौखला गए की झूठ पर भी उतारू हो गए और उन्होंने कुछ इस अंदाज में एक आम व्यक्ति से बात की, जरा देखिये 



एक आम व्यक्ति ने जावेद अख्तर और इनकी बेगम शबाना आज़मी के दोगलई पर निशाना साधा तो ये आग बबूला हो गए और इन्होने उस व्यक्ति से जिस अंदाज में बात की वो आपके सामने ही है 

जावेद अख्तर का कहना है की दूसरों के बाप दादा गद्दार थे और दुसरे गद्दारों की औलाद है, जबकि जावेद अख्तर के बाप दादा ने आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी है और अपना खून बहाया है 

जावेद अख्तर के मुताबिक उनके बाप दादा अंग्रेजो से लड़ रहे थे, ये इतना ही सच है जितना ये की सूरज पश्चिम से उगता है, वैसे आपको भी जावेद अख्तर के बाप दादा परदादा के बारे में कुछ जानकारी रखनी ही चाहिए, कड़वा है पर सच जानना आपका हक़ है 

जावेद अख्तर के लिए हम उनकी भाषा में ही ये आर्टिकल लिखेंगे, क्यूंकि उन्होंने एक आम व्यक्ति के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया जावेद अख्तर के लिए भी उसी भाषा का इस्तेमाल होना चाहिय 

जावेद अख्तर के बाप का नाम जन निसार अख्तर था, उन्होंने कभी आज़ादी की लड़ाई तो नहीं लड़ी पर अंग्रेजो के ही एक कॉलेज में ये नौकरी किया करते थे, इतना ही नहीं ये इनके बाप ने अंग्रेजो की ब्रिटिश नागरिकता भी स्वीकार कर ली थी, ये जीवन भर अंग्रेजो के चाटुकार ही रहे, आज़ादी के बाद ये लिखने का काम करने लगे 

जावेद अख्तर के दादा का नाम मुज़्तर खैराबादी था, वो अंग्रेजो के इतने चाटुकार थे की उन्होंने अंग्रेजो से "खान बहादुर" का तमगा भी ले लिया था, जीवन भर वो अंग्रेजो की चाटुकारी करते रहे 

जावेद अख्तर के परदादा का नाम फजल-ए-हक खैराबादी था, वो एक इस्लामिक चरमपंथी थे जो फतवाबाजी करते थे, अंग्रेजो ने उनको एक बार पकड़ लिया तो उन्होंने अंग्रेजो से माफीनामा भी माँगा था

परदादा के आगे जावेद अख्तर का कोई ठोस इतिहास नहीं है, कदाचित उस से पहले इनके पूर्वजों ने इस्लामिक आक्रान्ताओं की तलवार के सामने अपनी सलवार खोल कर इस्लाम स्वीकार कर लिया हो, चूँकि जावेद अख्तर अरबी तो है नहीं 

बाप, दादा, परदादा किसी ने अंग्रेजो के खिलाफ कभी लड़ाई नहीं लड़ी, और जीवन भर अंग्रेजो की चाटुकारिता करी, अंग्रेजो को माफीनामा दिया, अंग्रेजो से अवार्ड लिए, अंग्रेजो की नागरिकता भी ले ली और उनकी जी हजुरी करी, और आज ऐसे ही खानदान की औलाद जावेद अख्तर एक आम व्यक्ति को गद्दार की औलाद बताता है और स्वयं पर कहता है की उसके बाप दादाओं ने आज़ादी के लिए अपना खून बहाया