सारा कानून का जोर सिर्फ हिन्दुओ पर चलता है, कट्टरपंथियों से तो मिलार्ड और SC भी डरता है



पूरी जगन्नाथ मंदिर - ये मंदिर कोई सेक्युलर जगह नहीं है और न ही पर्यटक स्थल है - ये हिन्दू धर्म का एक धार्मिक स्थान है, ये सेक्युलर नहीं धार्मिक जगह है, और धार्मिक जगह के नियम कानून बनाने का अधिकार धर्म गुरुओं को होता है 

जगन्नाथ मंदिर में सिर्फ हिन्दुओ को प्रवेश देने का नियम सदियों पुराना है, इंदिरा गाँधी को भी इस पवित्र मंदिर में नहीं घुसने दिया गया था क्यूंकि वो हिन्दू नहीं थी 

पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक वामपंथी की याचिका पर मिलार्ड ने मंदिर प्रशासन से कहा की जगन्नाथ मंदिर में गैर हिन्दुओ को भी प्रवेश दिया जाये, इस मामले में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने साफ़ कर दिया है की गैर हिन्दुओ को प्रवेश नहीं दिया जा सकता, मंदिर धार्मिक स्थल है कोई सेक्युलर पर्यटक स्थल नहीं 

वैसे सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ी सी सुनवाई में ही हिन्दुओ के इस मंदिर पर अपना फरमान सुना दिया, ये वही  कोर्ट और मिलार्ड है जो की मुंबई के हाजी अली दरगाह में आजतक महिलाओं को प्रवेश नहीं दिला सके 

और न ही मिलार्ड इतनी हिम्मत दिखा पा रहे है की महिलाओं को दरगाह में प्रवेश दिलाने पर कुछ बोल सके, पर हिन्दुओ के मंदिर पर थोड़ी सी सुनवाई में फरमान सूना डाला 

मिलार्ड ने फिर एक बार साफ़ कर दिया है की कानून का सारा जोर सिर्फ हिन्दुओ पर ही चलता है, कट्टरपंथियों से तो मिलार्ड और सुप्रीम कोर्ट भी डरता है
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