बाड़मेर की घटना मीडिया के लिए मॉब लिंचिंग नहीं है, जहाँ दलित लड़के को मुस्लिम लड़की से बात करने पर मार दिया गया : राजा सिंह



दोनों घटनाएं 1 ही दिन की है, और 1 ही राज्य की है, अकबर खान को तो पूरा देश जान गया पर खेताराम नाम के दलित को कोई नहीं जानता 

अलवर में अकबर खान को किसने मारा इसका कोई सबूत मीडिया के पास नहीं है पर मीडिया ने दोष गौ रक्षको पर जड़ दिया है और हिन्दू समाज के खिलाफ "आतंकी, तालिबानी" जैसे शब्दों का इस्तेमाल शुरू हो गया है 

राजस्थान के ही बाड़मेर जिले में 22 साल के खेताराम को जो दलित युवक था उसे मुस्लिम लड़की से बात करने पर रस्सी से हाथ पैर बांधकर पीटा गया, और पीट पीट कर उसे मार दिया गया, पर इस मामले पर मीडिया में बिलकुल सन्नाटा है, ये खबर हमने दैनिक भारत के ऐप पर प्रकाशित की थी 

दैनिक भारत ऐप पर प्रकशित की गयी खबर का स्क्रीनशॉट




मीडिया के दोगलेपन पर विधायक राजा सिंह ने भी कटाक्ष किया है, उन्होंने कहा की राजस्थान के 2 अलग अलग जिलों में 1 ही दिन अकबर खान और खेताराम की हत्या हुई, पर मीडिया अकबर खान पर तो शोर मचा रहा है 

पर खेताराम जिसे मुस्लिम लड़की से बात करने पर मार दिया गया मीडिया और सेक्युलर नेताओं ने उसपर अपने मुह में दही जमा ली है, क्यूंकि खेताराम की खाबर मीडिया के लिए एजेंडा नहीं है, उसे शांतिदूत समुदाय ने जो मारा है 

राहुल गाँधी जैसे लोग और देश के तमाम बुद्धिजीवी अकबर खान पर तो शोर मचा रहे है, पर दलित खेताराम के लिए 1 भी शब्द इनके जबान से नहीं निकला है, और न ही निकलेगा, किस मानसिकता और एजेंडे के तहत देश की मीडिया और सेक्युलर नेता काम कर रहे है आप समझ सकते है 

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