हमे शरिया अदालत नहीं दे सकते तो मुसलमानो को अलग देश दिया जाये : मुफ़्ती नासिर उल इस्लाम


सेकुलरिज्म का ये ही अंजाम होना था, सांप को हमने दूध पिलाया, जैसे इनकी संख्या बढ़ रही है इनका असल रूप सामने आ रहा है, जो हम 70 साल से सेकुलरिज्म  चला रहे है आख़िरकार उसका अंजाम हमे मिलना शुरू हो गया

इन लोगो ने 70 साल पहले देश के मजहब के नाम पर टुकड़े करवाए, और उसके बाद भी हम नहीं सम्भले और सेक्युलर राष्ट्र बनाया, और आज ये लोग फिर उसी मांग पर आ गए

  मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  ने पिछले दिनों देश के हर जिले में शरिया अदालत लगाने का ऐलान किया, जब ये मामला सोशल मीडिया पर उठाया गया तो बाद में मीडिया और पुरे देश में भी ये मामला उठा, और  कट्टरपंथियों का विरोध शुरू हुआ 

और अब ये कट्टरपंथी अपने असल एजेंडे पर वापस आ ही  गए, देश के एक इस्लामिक मजहबगुरु मुफ़्ती नासिर उल इस्लाम ने शरिया अदालत न मिलने की सूरत में मुसलमानो के लिए अलग देश की मांग कर दी है, अलग देश बने मुसलमानो अगर भारत के अंदर शरिया नहीं मिल सकता 


और इतना ही नहीं कांग्रेस ने इस मुफ़्ती की मांग का समर्थन भी कर दिया है 

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कर्णाटक में कांग्रेस के नेता और सरकार में मंत्री ज़मीर अहमद खान  ने शरिया अदालत और शरिया अदालत न मिलने की सूरत में अलग देश का  समर्थन कर दिया है 

शरिया अदालत भारत में नहीं मिल सकता तो मुसलमानो के लिए अलग देश दिया जाये, ये मांग है अब इनकी, और जैसे जैसे इनकी आबादी अभी बढ़ेगी इनकी ये मांग तेज भी होगी 

पाकिस्तान की मांग भी इन लोगों ने 1947 में नहीं  बल्कि 1930 के दशक में ही शुरू किया था, आज इन लोगों ने फिर नए देश की मांग कर दी, इनकी क्या मानसिकता है ये समझा जा सकता है, हमारे सेकुलरिज्म के कारण ही देश बर्बादी की ओर बढ़ रहा है 

जो सेक्युलर दिन रात सेकुलरिज्म की बात करते है और हिन्दुओ पर निशाना साधते है, वो लोग मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांग पर चुप होकर अलग देश और शरिया अदालत को समर्थन भी दे रहे है 
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