सरकारी स्कुलों के नाम मे इस्लामिया जोड़ दिया गया तो क्या बुरा हुआ, कोई वजह होगी : राज बब्बर



पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के तक़रीबन 7 ऐसे प्राथमिक स्कुल है, जिनको स्थानीय मुस्लिमो ने मदरसा बना दिया, ये सभी स्कुल सरकारी स्कुल है, प्राथमिक स्कुल है, जो गाँव में होते है, इन गाँव में मुसलमानों की आबादी 50% से ज्यादा है

7 प्राथमिक सरकारी स्कूलों के नामो में "इस्लामिया" शब्द जोड़ दिया गया, प्राथमिक स्कूलों में कुरआन पढाई जाने लगी, छुट्टी रविवार को होती है, तो इन स्कूलों में छुट्टी शुक्रवार को दी जाने लगी, सरकारी स्कूलों को मुस्लिम बहुल इलाकों में इस्लामिक स्कुल बना दिया गया 




इन स्कूलों का ऐसा नाम आज से नहीं बल्कि योगी सरकार के पहले से है, यानि तमाम सरकारों ने इसे ऐसे ही चलने दिया, ये है इस देश के सेक्युलर सरकारों का हाल, ये तो गनीमत रही की उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी सरकार आई 

और तब जाकर मुस्लिम बहुल गाँव में किये गए इस करतूत का पता चला, अब प्रशासन ने इसपर कार्यवाही की है और इस्लामिया शब्द हटाये गए है, और आगे की कार्यवाही की जा रही है 

जिन इलाकों में मुस्लिम बहुसंख्यक हुए वहां सरकारी स्कूलों को मदरसा बना दिया, बच्चों को कुरआन अल्लाह् पढ़ाने लगे, देश में बहुसंख्यक होकर ये भारत को बदलकर क्या कर देंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, इस मामले पर तमाम सेक्युलर नेता चुप है 

पर मामला जब सोशल मीडिया पर उठाया गया, तो मीडिया वालो ने भी नेताओं से पूछना शुरू कर दिया और आज कांग्रेस नेता राज बब्बर से इस मामले पर पुछा गया, तो राज बब्बर ने उल्टा इसका समर्थन कर दिया 

राज बब्बर ने कहा की - उत्तर प्रदेश के कुछ सरकारी स्कूलों के नाम में अगर इस्लामिया शब्द जोड़ दिया गया है तो इसमें क्या गलत है, कुछ वजह होगी जिसके कारण ऐसा नाम रखा गया, कांग्रेस पार्टी ने साफ़ कर दिया की स्कूलों को इस्लामिक बना देना कुछ बुरा नहीं है 

वैसे हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पार्टी को मुसलमानों की भी पार्टी बताया है, और अब सरकारी स्कूलों को इस्लामिक बना देने में भी कांग्रेस को कुछ बुराई नजर नहीं आ रही है, ये कांग्रेस का सेकुलरिज्म है 

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