देश साथ इस खानदानी कांग्रेस ने क्या किया है - ये तस्वीर बताने के लिए काफी है



राहुल गाँधी पिछले दिनों जुलाई 2018 में अपने संसदीय सीट अमेठी के दौरे पर गए, वहां वो झोपड़पट्टी में घूम रहे थे, लोग हाथ जोड़कर खड़े थे, राहुल गाँधी वहां थोड़ा बहुत घूमे,  फिर लक्ज़री गाडी में बैठकर टूटी फूटी सड़कों से होते हुए निकल गए, और उसके बाद विदेश चले गए 

अमेठी आज भी वैसा ही है जैसे आज से कई दशक पहले 1980 के ज़माने में था, बस लोगों की शक्ल बदल गयी है, पर अमेठी आज भी वैसा ही है, यहाँ पर लोगों में गुलाम मानसिकता ऐसी है की यहाँ के लोग खुद को नेहरू खानदान का गुलाम ही मानते है, तभी तो बार बार इनको जितवाते है, जबकि इन लोगों ने अमेठी में कुछ भी काम नहीं किया 

राहुल गाँधी अमेठी के  झोपड़पट्टी में सैर करते - जुलाई 2018 
आपने ऊपर  की अमेठी की तस्वीर देख ली, राहुल गाँधी एक झोपड़पट्टी में घूम रहे है, अब हम आपको 1980 के दशक की 2 तस्वीरें दिखाते है, ध्यान से देखिये 

राजीव गाँधी अमेठी के झोपड़पट्टी में सैर करते हुए 
इटली की सोनिया गाँधी भी अमेठी के झोपड़पट्टियों में सैर करती हुई 

अब आप 1980 के दशक की और 2018 की तस्वीर देख लीजिये, सभी तस्वीरें अमेठी की ही है, कुछ नहीं  बदला अमेठी में बस शक्लें बदल गयी है

अमेठी के लोग अब भी नहीं खुद को गुलाम मानसिकता से  ऊपर उठाते तो राहुल गाँधी के बाद प्रियंका वाड्रा के बच्चे यहाँ इसी तरह घुमा करेंगे कुछ दशकों में, पर झोपड़पट्टियां यूँ  बरक़रार रहेंगी और लोगों का जीवन भी 

गलती सिर्फ नेताओं की थोड़ी है, मुख्य गलती तो जनता की है, जो सेकुलरिज्म, जातिवाद और गुलाम मानसिकता से ऊपर आने का नाम ही नहीं ले रही 
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