पर नहीं खुल रही 1 भी दलित नेता या दलित चिंतक की जबान, ये लोग भी कर रहे शरिया का मूक समर्थन



पहले तो हम आपको  आंबेडकर और इन दलित नेताओं और दलित चिंतको के बीच का अंतर बता देते है - आंबेडकर का मानना था की मुस्लिम भारत के लिए खतरा है और बंटवारे के बाद सभी मुसलमानो को भारत से बाहर पाकिस्तान भेजना चाहिए, आंबेडकर ने कहा था की मुसलमान यहाँ रहे तो भविष्य में ये अलगाव और बंटवारे की समस्या फिर होगी

जबकि आज ये ये जो दलित चिंतक और दलित नेता है - ये तो ऐसे है की अगर अब्दुल कहीं पर दलित को मारे, दलित महिला का रेप करे तो इनकी जबान तक नहीं खुलती, क्यूंकि ये लोग अब्दुल के साइड है दलितों के नहीं 

देश के कट्टरपंथियों को आंबेडकर अच्छे से समझते थे, और वो जानते थे की भविष्य में ये कट्टरपंथी फिर समस्या उत्पन्न करेंगे, और जैसे जैसे कट्टरपंथियों की आबादी बढ़ रही है, आंबेडकर की बात भी सच साबित होती जा रही है 

अब कट्टरपंथी खुलेआम आंबेडकर के संविधान को चुनौती दे रहे है, आंबेडकर का संविधान  इस देश में सबसे ऊपर है, पर ये कट्टरपंथी संविधान को रिजेक्ट कर शरिया को सबसे ऊपर बता रहे है, और अब तो एक कट्टरपंथी ने शरिया अदालत न मिलने की सूरत में मुसलमानो के लिए अलग देश की मांग भी कर दी 

सीधे आंबेडकर के संविधान को ये कट्टरपंथी चुनौती दे रहे है, वो संविधान जिस से ये देश चला करता है, इन  कट्टरपंथियों की आलोचना सिर्फ देश के राष्ट्रवादी कर रहे है, कांग्रेस पार्टी के नेता ज़मीर अहमद खान ने जो की कर्णाटक में मंत्री भी है, उसने भी शरिया अदालत का समर्थन कर दिया है 

यहाँ बड़ी चीज ये है की इस देश में बात बात पर आंबेडकर के नाम पर राजनीती करने वाले बहुत से लोग एक्टिव है, कहीं आंबेडकर की मूर्ति पर आंच आ जाये तो ये लोग राजनीती करने लगते है, जबकि देश के कट्टरपंथी तो सीधे आंबेडकर के संविधान को चुनौती दे रहे है 

प्रकाश आंबेडकर नाम का अर्बन नक्सली है, ये आंबेडकर का वंशज है, इसके अलावा जिग्नेश मेवानी जैसा इस्लामिक कट्टरपंथी जो दलित के भेष में घूमता है, इसके अलावा मायावती, और रविश कुमार पांडे जैसे वामपंथी लोग, इनमे केजरीवाल भी शामिल है, लेफ्ट वाले भी शामिल है, राहुल गंधी भी शामिल है 

ये तमाम वो लोग है जो बात बात पर आंबेडकर पर राजनीती करते है, ये लोग संविधान हिन्दुओ के कारण खतरे में है ये मुद्दा उठाकर राजनीती करते है, पर ये तमाम लोग कट्टरपंथियों द्वारा जो संविधान को चुनौती दिए जाने पर चुप है, और कांग्रेस पार्टी का एक मंत्री तो समर्थन कर भी चूका है 

आंबेडकर के संविधान को जला देने पर आमादा है देश में कट्टरपंथी पर प्रकाश आंबेडकर, मायावती, मेवानी, राहुल गाँधी, रविश कुमार जैसे लोग जैसे लोग मौन है, पता है क्यों, क्यूंकि ये लोग खुद भी इस्लामिक कट्टरपंथियों के साथ है, ये कभी दलितों या आंबेडकर के रहे ही नहीं, ये सिर्फ इस्लामिक कट्टरपंथियों के है, और आज जब इस्लामिक कट्टरपंथी आंबेडकर के संविधान को चुनौती दे रहे है तो ये लोग इस्लामिक कट्टरपंथियों का मूक समर्थन कर रहे है 

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