देश का राष्ट्रपति दलित और एक चाय-वाला बना PM, यही है असली आजादी : चीफ जस्टिस


स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के Chief Justice जेएस खेहर ने संविधान के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने के बारे में बताया और कहा कि यहां अलग-अलग धर्म के लोग हैं। Chief Justice ने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की सराहना करते हुए कहा कि हमारे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद एक दलित परिवार से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कभी चाय बेचते थे। अपने बारे में उन्होंने कहा कि वह भारतीय थे, लेकिन केन्या के नागरिक के तौर पर पैदा हुए थे क्योंकि उनके पैरेंट्स उन दिनों वहीं रहते थे, लेकिन अब वह भारत के Chief Justice हैं। यह होती है स्वतंत्रता। हर कोई आज एक साथ है। हर कोई एक समान है। जब आप स्वतंत्र होते हैं तो हर चीज आप पा सकते हैं। 

Chief Justice ने कहा कि सभी भारतीय होने पर गर्व करते हैं। यह देश तमाम धर्मों का सम्मान करता है और इस पर गर्व होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट परिसर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर Chief Justice जेएस खेहर ने ये बातें कहीं। इस मौके पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे।

अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे बेटे ने एक टी-शर्ट गिफ्ट में दिया था और जिस पर लिखा था सिख होने पर गर्व है। मैं सोचता हूं कि मैंने पहले उसे क्यों नहीं पहना। तब मैं इस बात से बेहद खुश हुआ था। मैं बेहद खुशनसीब हूं कि ऐसे देश में रहता हूं, जहां आपका अपने धर्म पर गर्व करने के लिए सम्मान किया जाता है। यहां हर धर्म का सम्मान है। 

कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें हम जानते नहीं : उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए कहा कि कैसे उन्होंने अपने को देश के लिए न्योछावर कर दिया। कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्हें लोग जानते भी नहीं हैं लेकिन देश के लिए उन्होंने सबकुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने अब्दुला और शेर अली अफरीदी जैसे कुछ नायकों का नाम लिया और कहा कि इन्हें सम्मान मिलना चाहिए। 

 दरअसल समारोह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष आरएस सूरी ने कहा कि गुमनाम सिपाहियों के लिए सम्मान होना चाहिए। Chief Justice ने कहा कि अब्दुला एक वहीदी मुसलमान थे। 28 सितंबर 1871 को कोलकाता हाई कोर्ट के तत्कालीन Chief Justice की उन्होंने हत्या की थी। उन्होंने गिरफ्तारी दी और कहा कि वह ब्रिटिश सरकार की भेदभाव की नीतियों से नाराज हैं। इसके बाद भारत के गवर्नर जनरल मायो ने कहा कि वह तमाम वहीदी मुसलमानों को खत्म करेंगे। 

बर्मा लौटते वक्त अंडमान में रुके हुए थे इसस दौरान शेर अली अफरीदी ने 8 फरवरी 1872 को उन्हें चाकू मार दिया था। अफरीदी वहीदी मुसलमान थे। उन्हें फांसी दी गई। एक बार उन्होंने शेर अली अफरीदी के बारे में किसी से पूछा था तो उन्हें क्रिकेटर के बारे में बताया गया। दरअसल गवर्नर जनरल को मारने वाले लोगों को कोई पहचानता ही नहीं है।