कांग्रेस हिस्सा लेकर छोड़ देती थी, पर मोदी सरकार में चोर पकडे जाते है, ED सम्पत्तियाँ जप्त करती है



ऊपर जो पोस्ट में जानकारियां है वो काफी गंभीर और आँख खोल देने वाली है 
भारतीय सरकार के पास एक एजेंसी है जिसे आमतौर पर ED के नाम से जाना जाता है, परवर्तन निदेशालय भी इसे कहते है 

ED आज की नहीं बल्कि बहुत पहले की बनी हुई संस्था है 
2004 से लेकर 2014 तक इस देश में कांग्रेस की सरकार थी, मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, मुख्य तौर पर आप इस सरकार को सोनिया सरकार कह सकते है 

भारत एक बड़ा देश है 
2004 से लेकर 2014 तक यानि 10 साल हमारे देश की ED ने भ्रष्टाचारियों के 8000 करोड़ की सम्पत्तियों को जप्त किया, 8 हज़ार करोड़ 10 साल में 

आप जानकार चौंक जायेंगे की 2014 से लेकर 2017 तक यानि 3 साल में ED ने देश भर में 28000 करोड़ की सम्पत्तियाँ जप्त की है, अट्ठाइस हज़ार करोड़ 3 साल में 
इसमें लालू जैसों की सम्पत्तियाँ भी शामिल है 

* लालू कुनबे की 1000 करोड़ की सम्पत्तियाँ अबतक जप्त की गयी है 

पहले भी भ्रष्टाचारी थे 
पर जो भ्रष्टाचारी कांग्रेस को हिस्सा दे देते थे, उन्हें ED छोड़ दिया करती थी, भ्रष्टाचार करो कांग्रेस को हिस्सा दो और मजे करो 

पर ये मोदी सरकार ये तो भैया नेताओं को भी नहीं छोड़ती 
लालू यादव उदाहरण है, और नेशनल हेराल्ड से लेकर दामाद जी तक कई केस अभी चल रहे है आने वाले  दिनों में ED बहुत कुछ करती नजर आएगी 

ये है फर्क, सोनिया सरकार में चोर तत्व कांग्रेस को हिस्सा दे देते थे, मजे करते थे 
पर मोदी सरकार के दौरान चोर पकडे जाते है, ED सम्पत्तियाँ जप्त करती है