"वंदे मातरम" के बाद "ॐ नमः शिवाय" पर कट्टरपंथियों ने जताया ऐतराज़, मचाया हंगामा !

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जहाँ एक तरफ वो मज़हबी ठेकेदार जो वन्देमातरम के अपमान पर खुश हो रहे हैं , जहाँ एक तरफ उन्हें भारत माता की जय शब्द से इतनी नफरत है कि वो खुल कर कहते हैं कि मर जायेंगे पर भारत माता की जय नहीं बोलेंगे वही दूसरी तरफ अगर कोई ॐ नमः शिवाय का जाप कर दे तो उन्हें अचानक ही समस्या हो जाती है . 

आखिर वो कौन सी विचारधारा है जो उनसे ये सब करवा रही है और विचार का विषय ये भी है कि वो ऐसा खुद से कर रहे हैं या किसी के इशारे पर ? वो कौन सी विचारधारा है जो उन्हें भगवा , राम , वन्देमातरम , शिव , ॐ ,भारत माता आदि शब्दों से दूर कर रही है जबकि वो खुद टी वी पर कहते हैं कि उनकी नसों में वतनपरस्ती और दूसरे धर्मों का सम्मान कूट कूट कर भरा हुआ है . क्या ये घटना जो अब एक महिला के साथ हो रही है उसका उत्तर वो ऐसा दे सकते है जो समाज के बहुसंख्यक सेकुलर लोगों को संतुष्ट कर सके ?

ज्ञात हो कि कांग्रेस की एक महिला नेत्री नूरी खान ने ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो और फोटो जैसे ही डाली वैसे ही तूफ़ान मच गया . जय श्री राम बोलने वाले विधायक को माफ़ी मंगा चुके तमाम मजहबी ठेकदार जोश मे लबरेज़ थे और उन्होंने उस महिला नेत्री के खिलाफ धावा जैसा बोल दिया .. एक बड़े कट्टर मजहबी ठेकेदार ने 'तो आज कर दो फतवा जारी' नाम से एक पोस्ट और वीडिया पर शहर के काजी खलीकुर्रेहमान ने प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सदस्य नूरी खान का पॉलीटिकल स्टंट बताया। 

नूरी खान ने 'तो आज कर दो फतवा जारी' शीर्षक के पोस्ट में मज़हब के ठेकदारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि "न केसरिया तेरा है न हरा मेरा है। न भगवा रंग किसी के बाप का है, न हरा रंग। मैंने भगवा रंग भाईचारे और एकता के लिए पहना है"।

इसके जवाब में काज़ी खलीकुर्रेहमान ने कहा कि "नूरी के जाप से धार्मिकता का कोई लेना-देना नहीं। ये महज राजनीतिक स्टंट है। उनकी पोस्ट 'तो आज जारी कर दो फतवा जारी" उनकी नादानी है। मैं इसे अच्छा नहीं मानता। फतवे का इससे क्या लेना-देना"। 

जहाँ एक तरफ सभी मत मजहब के सम्मान की बातें होती हैं वही दूसरी तरफ ना जाने क्यों मौक़ा मिलते ही कोई ना कोई ऐसी घटना सामने आ जाती है जो उनके टी वी पर बोले तमाम दावों को झूठा साबित कर ही देती है .