कड़वा सच : पश्चिमी संस्कृति की नक़ल करते करते भारत का हिन्दू आदमी से बन्दर हो चूका है !



पश्चिमी संस्कृति की नक़ल करते करते भारत का हिन्दू आदमी से बन्दर हो चूका है !
और ये बात 100% सच है 
क्यूंकि नक़ल करते करते, कॉपी करते करते, हम बिलकुल बन्दर हो चुके है 

होता ये था की यूरोप में अवैध संतानें बहुत सी होती थी, तो बहुत से लोग अपने बच्चों को चर्च और अनाथालय के बाहर छोड़ देते थे 
अब चर्च का हेड होता है पादरी, इसलिए ऐसे बच्चे जिनको छोड़ दिया जाता था, वो चर्च में ही पाले जाते थे, चर्च द्वारा अनाथालय संचालित होते थे, तो उसके हेड यानि पादरी को ऐसे बच्चे फादर कहकर बुलाते थे 

चर्च में नन भी होती है, पर उसे मदर नहीं बोलते 
उन्हें सिस्टर बोलते है, ये नन पादरी की सहायिका होती है, इसलिए बच्चे पादरी को फादर और नन को सिस्टर कहा करते थे, यूरोप में आज भी ऐसा ही है 

पर भारत में 
यहाँ फिल्मो की देखा देखी, बहुत से सेक्युलर हिन्दू जो चर्च इत्यादि भी मत्था टेकने जाते है 
इनके घर में इनका असली बाप होता है, फिर भी ये चर्च के पादरी को फादर कहते है 

ये तो हद ही हो गयी मूर्खता की, कहना है तो मामा कहो, चाचा कहो, पर फादर 
नक़ल करने की हद होती है, पर हमने मूर्खता में हद भी पार कर दी है, खुद का बाप होते हुए भी दूसरे शख्स को नकलची बन्दर बनकर फादर फादर करते फिरते है