जिनके साथ हैवानियत हुई वो मुद्दा न बन सकी, पर जिन्होंने आरोप लगाए वो मीडिया डिबेट का हिस्सा है !


11 साल की बिहार की नैंसी झा, 16 साल की हिमांचल की गुड़िया मुद्दा नही बन सकी जबकि इनके साथ हैवानियत की अति हुई थी, इनकी बर्बरता से हत्या हुई, ये आज हमारे बीच नहीं है ....फिर भी ये मुद्दा नहीं बनती 

यहां मुद्दा बनता है जसलीन कौर का बयान, उसके आरोप, गुरमेहर कौर का बयान, उसके आरोप, मुद्दा बनता है वर्णिका जैसो का आरोप......क्यो??

वामपंथी विचारधारा से ग्रस्त भारतीय मीडिया और सेक्युलर लोग बस इसी ताक में रहते की कोई ऐसा मुद्दामिले जिसमे भाजपा वाला एंगल आये या प्रयत्नपूर्वक लाया जा शके और ये उसी मुद्दे पर मोदी/भाजपा  को घेर कर अपना घाघरा उठा कर नाच सके .....

इनका बस चले तो जिन मामलों में बीजेपी वालो पर आरोप लगे उनकी जांच भी नही होने दे, सीधे फांसी चढ़ा दे ये लोग.......लड़की आधी रात को नशे में धुत सड़क पर गाड़ी दौड़ाती है, साथियों पर अपने अफसर बाप का रौब झाड़ती है, पुलिस को दिए बयान बदलती है

ये ही तो एक सच्ची लड़की है जिसका मेडिकल कराना भी पुलिस ने उचित नही समझा 
जय हो वामपंथी की ।।

इन तमाम मामलों में सिर्फ आरोप ही तो लगे है, अभी तक क्या किसी कोर्ट ने उन लड़कों को दोषी घोषित किया है ? 
कोई भी लड़की आरोप लगाए तो FIR तो होती ही है, ये कानून है - पर जिसपर आरोप है उसपर अभी तक किसी कोर्ट ने सुनवाई तक नहीं की 

रोहतक की बहने, जसलीन कौर, गुरमेहर कौर - ये तमाम लोग झूठे साबित हुए है
उसके बाद मीडिया ने कभी इनपर माफ़ी मांगी है ?