इजराइल की चीन को सीधी चेतावनी, "भारत पर हमले की पहल की तो बीजिंग पर पहला आक्रमण हमारा होगा"


भारत का महाशक्ति के साथ मिलना अब चीन के लिए एक बुरी खबर बन कर सामने आया है। ड्रैगन को सबक सीखाने के लिए उसी की भाषा में सबक सीखाने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। भारत के साथ अमेरिका के अच्छे सम्बन्ध को स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। 

अमेरिका ही नहीं अपितु दुनिया का ऐसा देश भी भारत के साथ में है जिसपर लगातार आक्रमण होते रहते हैकि फिर भी आज तक कोई पराजित नहीं कर पाया। उस बड़ी शक्ति का नाम इजराइल है। जैसा की आप लोगो को ज्ञात हो कि इज़राइल के राष्ट्रपति रियूवीन रिवलिन ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अगर भारत की तरफ चीन आंख उठाकर भी देखेगा तो बीजिंग पर पहला आक्रमण मेरा होगा।

चीन के साथ बढ़ते विवाद और तनातनी के बीच भारतीय सेना के लिए एक अच्छी खबर है। विश्व की महाशक्ति अमेरिका के एक शीर्ष कमांडर ने भारतीय सेना को आधुनिक बनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा दोनों देश मिलकर भारत की सैन्य क्षमताओं में 'अहम और सार्थक' तरीके से सुधार कर सकते हैं। इस खबर को सुनते ही चीन के अंदर खलबली मच गयी है। 

अब उसे कुछ सूझ नहीं रहा है कि वो क्या करे अगर चीन भारत की तरफ एक कदम भी आगे बढ़ाया तो ये महाशक्तियां उसे तबाह कर सकती है। इसी खबर ने पाकिस्तान को भी झकझोर कर रख दिया है। अब जहा एक तरफ चीन अपने आप को अकेला समझ रहा है वही भारत इन महाशक्तियों के साथ चीन को मुँह तोड़ जबाब देने को तैयार है।

बता दे कि पिछले एक दशक से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा कारोबार करीब 15 अरब डॉलर के आंकड़े को छू चुका है और उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में इसमें बहुत ज्यादा तेजी आएगी। भारत अमेरिका की मदद से अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना चाहता है।

भारत अमेरिका से इसके लिए कुछ नवीनतम मिलिटरी हार्डवेयर खरीदना चाह रहा है जिसमें फाइटर जेट्स, लेटेस्ट अनमैन्ड वीइकल और एयरक्राफ्ट कैरियर्स शामिल हैं। यूएस पैसिफिक कमांड के कमांडर ऐडमिरल हैरी हैरिस ने कहा, 'मैं मानता हूं कि अमेरिका भारत की सेना को आधुनिक बनाने में मदद करने को तैयार है. भारत अमेरिका का एक बड़ा रक्षा साझेदार है. यह रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका दोनों के लिए अद्वितीय है. यह भारत को उसी पायदान पर रखता है जिसपर हमारे कई दूसरे अहम सहयोगी हैं। '

ऐडमिरल हैरिस ने कहा, 'हम मालाबार सैन्य अभ्यास श्रृंखला में कई सालों से इंडिया के पार्टनर हैं. मैंने सबसे पहले सैन्य अभ्यास में हिस्सा भी लिया था जो 1995 में हुआ था। 'हैरिस ने यह भी कहा कि वह बहुत खुश हैं कि जापान भी अब मालाबार सैन्य अभ्यास का हिस्सा है. 

ऑस्ट्रेलिया के भी अभ्यास में हिस्सा लेने की वकालत करते हुए ऐडमिरल हैरिस ने कहा, 'मैं समझता हूं कि भारत, जापान और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय संबंध बहुत ही अहम हैं। ' बता दे कि इन महाशक्तियों के साथ अब ऑस्ट्रेलिया भी अपना हाथ बढ़ाने को तैयार है। ऑस्ट्रेलिया भी चीन की हरकतों से वाकिफ हो गया है इसलिए ऑस्ट्रेलिया भारत का साथ देने के लिए तत्पर है।

ये उन सभी के लिए एक बड़ा सन्देश है जो आये दिन विदेश यात्राओं का नाम ले कर मज़ाक बनाया करते थे ..