याकूब प्रेमी वेमुला को जबरन दलित बनाकर मातम, पर असली दलित राजेश की हत्या पर चुप्पी !



हमारे देश में एक वर्ग है जो दलित दलित की बात करता रहता है 
मायावती, राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल, लालू यादव, देश के वामपंथी और आजकल तो ये ओवैसी भी दलित दलित करता है 

इनका मुख्य लक्ष्य है - दलितों को हिन्दू धर्म से तोड़कर धर्मांतरित करना, हिन्दुओ को कमजोर करना, खैर आज मुद्दा ये नहीं है, इस पोस्ट का मुद्दा कुछ और ही है 

हैदराबाद में एक ईसाई  रोहित वेमुला जो की बहुत बड़ा मक्कार और जालसाज था 
उसने फर्जी दलित सर्टिफिकेट बनवाया, वो दलित था ही नहीं, यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के लिए उसने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और एडमिशन लिया 

याकूब मेमन का समर्थक था, इस्लामिक आतंकवाद का प्रेमी था 
कथित रूप से उसने आत्महत्या कर ली, अब आत्महत्या कर ली या वामपंथियों ने उसे राजनीती के लिए मौत के घाट उतार दिया ये जांच का सवाल है, पर उसकी मौत के बाद राहुल गाँधी से लेकर केजरीवाल 
और देश का हर दलित प्रेमी नेता और बुद्धिजीवी छाती पीटने लगा, देश की संसद से लेकर सड़क तक पर 
दलित को मार डाला, दलित को मार डाला का कैसेट बजने लगा 

जबकि रोहित वेमुला तो दलित था भी नहीं, वो तो 2005 में ही वामपंथियों के संपर्क में आकर धर्मांतरण कर ईसाई बन चूका था, खैर 

नकली और जालसाज दलित रोहित वेमुला पर पुरे देश के सेकुलरों और वामपंथियों ने आंसू बहाये 
अब आइये एक दूसरी घटना पर जो हाल ही में हुई 

राजेश नाम के एक हिन्दू को जो असल में दलित भी था उसे वामपंथियों ने केरल की राजधानी त्रिवंतपुरम में मौत के घाट उतार दिया, राजेश ने आत्महत्या नहीं की 
उसकी हत्या की गयी, धारदार हथियारों से बर्बर तरीके से काटकर राजेश को मारा गया 

मायावती, राहुल गाँधी, लालू यादव, ओवैसी और मीडिया में जितने भी दलित प्रेमी घूमते है 
असली दलित की हत्या पर सब चुप है, केजरीवाल और राहुल गाँधी से तो 1 ट्वीट भी नहीं किया जाता 

ये तो हद हो गयी बेशर्मी की, नकली दलित को जबरन दलित बनाकर आंसू 
और असली दलित की हत्या पर सबकी चुप्पी, वाकई देश के सेक्युलर तत्व अव्वल दर्जे के दोगले है