खड़गे ने राहुल को बताया "शहीद का बेटा", लोगों ने कहा, "बोफोर्स दलाली करने वाला शहीद कैसे हुआ" ?


संसद में बैठे सभी नेतागण किस प्रकार के ओछे और अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करते हैं यह किसी स छिपा हुआ नहीं है,लेकिन अब कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के द्वारा फैलाये जाने वाले झूठ का पर्दाफाश कर लोकसभा में हो गया!संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पिछले दिनों गुजरात के बनासकांठा में राहुल गांधी के काफिले पर हुए पथराव के मामले में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया.

हमलावर विपक्ष ने सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि “राहुल गांधी पर किए जा रहा हमला दुर्भाग्‍यपूर्ण है लेकिन वह इससे डरेंगे नहीं. उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी शहीद के बेटे हैं और उनके डरने का सवाल ही नहीं उठता.उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी शहीद के बेटे हैं और उनके डरने का सवाल ही नहीं उठता.” खड़गे यहीं नहीं रुके बल्कि 4 कदम आगे जाते हुए खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ तो गोली मारकर जान लेते हैं, यहां तो पत्‍थरबाजी करके उनकी ( राहुल गांधी) जान लेने की कोशिश हो रही है. 

उन्‍होंने बीजेपी नेता के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि “बीजेपी नेता और सरकार की तरफ से यह वक्‍तव्‍य आया था कि जम्मू और कश्मीर में जो पत्‍थरबाजी हो रही है, वह आतंकवादी कर रहे हैं. खड़गे ने सवाल उठाया कि अब गुजरात में कौन से आतंकी आ गए, क्‍या जम्‍मू और कश्‍मीर से आए? क्‍या बीजेपी के कार्यकर्ता आतंकी बनकर उनकी जान लेना चाहते थे?” सरकार की तरफ से भी जबरजस्त जवाब आया जहाँ जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “राहुल गांधी ने सुरक्षा नियमों का उल्‍लंघन किया है.

उन्होंने जानबूझकर खुद को खतरे में डाला, वह उस जगह रुके जहां उनका कोई कार्यक्रम नहीं था. सिंह ने यह भी कहा कि गुजरात सरकार मामले की जांच कर रही है और एक आरोपी को पकड़ लिया गया है.” गृह मंत्री ने आगे कहा कि “राहुल गांधी ने अपने पीएसओ की बात मानी,

एसपीजी की नहीं और बुलेटप्रूफ गाड़ी की जगह पार्टी की गाड़ी से गए.” यह काफी हास्यास्पद बात है कि राहुल गांधी खुद ही SPG की सुरक्षा गाइडलाइन्स को मानने से इनकार करते हैं और SPG और सुरक्षाबलों द्वारा दी जाने वाली बुलेटप्रूफ गाड़ी को लेने से मना करते हैं,फिर जब उनके ऊपर कोई हमला होता है तो वो सरकार को दोषी ठहराते हैं।ये लोकतंत्र में एक नई ही राजनीति का चेहरा देखने को मिल रहा है।