क्या आपको नहीं लगता की देश को वामपंथियों की सड़ीगली किताबों से आज़ादी दिलवाना बहुत जरुरी है ?



क्या आपको नहीं लगता की देश को वामपंथियों की सड़ीगली किताबों से आज़ादी दिलवाना बहुत जरुरी है ? 
क्यूंकि ये सोशल स्टडीज की किताबें है, इतिहास की अधिकतर किताबें है 
आज भी वामपंथियों द्वारा लिखी गयी ही चल रही है 

स्कुल कॉलेज हर जगह आज भी अधिकतर शिक्षा बच्चों को वही दी जा रही है जो वामपंथी चाहते है 
आधी अधूरी शिक्षा, अजेंडे के तहत शिक्षा 
ताकि बच्चा स्कुल कॉलेज से निकलते ही हिन्दू विरोध बन जाये, उसके मन में हिन्दुओ के प्रति हीन भावना कूट कूट कर डाली जाती है 

ये बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, अरविन्द केजरीवाल 
ये सब जन्मजात हिन्दू विरोधी थोड़ी है, इसी वामपंथी शिक्षा का तो नतीजा है ये सब, ये कन्हैया कुमार और बाकि जितने भी सेक्युलर और वामपंथी इस देश में घूम रहे है 

अब आप स्वयं बताइये की 
आपने समाजशास्त्र या सोशल स्टडीज की किताबों में भारत की कुरीतियों के बारे में पढ़ा होगा 
आपने कई बार प्रश्न का उत्तर लिखते हुए भी कुरीतियों पर लिखा होगा 

आपको किन कुरीतियों की के बारे में बताया गया 

* सती प्रथा, बाल विवाह, दहेज़ प्रथा, पर्दा प्रथा, इत्यादि इत्यादि

पर क्या आपको कभी आपकी किताबों में, आपके स्कुल कॉलेज में 

* हलाला प्रथा, बहु-विवाह प्रथा, बहन-विवाह प्रथा, तीन तलाक प्रथा, बुर्खा प्रथा, इत्यादि के बारे में बताया गया 
जो आज भी धड़ल्ले से चल रही है 
ये भी कुरीतियां ही है, पर इनके बारे में आपको नहीं बताया जाता 

ये हलाला तो एक तरह से बलात्कार ही है, औरत की इक्षा के खिलाफ उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना, उसपर दबाव बनाना तो बलात्कार ही हुआ 
पर इस कुरीति के बारे में तो अधिकतर भारतीयों ने 2016 के बाद जाना जब सोशल मीडिया और उसके बाद मीडिया में ये मुद्दा छाया 

पर सोशल स्टडीज और इतिहास इत्यादि की किताबों में इन कुरीतियों को कभी लिखा तक नहीं गया 
क्या ये कुरीतियां भारत में नहीं चल रही 
साफ़ है की आपको जो पढ़ाया जा रहा है, किताबों में बताया जा रहा है वो आधा अधूरा है, बेकार है 



जरुरत है की वामपंथी शिक्षा को हटाया जाये 
ताकि सत्य और सही शिक्षा बच्चों को मिले और एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके