शराब, नाचना तो इस्लाम में गंभीर अपराध है, फिर भी शाहरुख़, फारुख जैसों के खिलाफ फतवा क्यों नहीं ?



जब भी हम फतवा शब्द सुनते है 
हमारे मन में एक मुल्ला मौलवी की तस्वीर आ जाती है, जो बेहद दोगला होता है, क्या करे बस यही आता है हमारे मन में 

अक्सर फतवे आते रहते है 
रोज कहीं का कहीं कोई फतवा आता है, मीडिया और सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होती है 
अभी हाल ही में सेकुलरिज्म को खारिज करते हुए कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम नेता के खिलाफ फतवा दे दिया क्यूंकि उसने भगवान् राम का नाम लिया 

कट्टरपंथियों ने साफ़ कर दिया की इस्लाम में सेकुलरिज्म की कोई जगह नहीं है 
वैसे हमारे मन में बार बार ये प्रश्न उठता है की इस्लाम में तो बहुत सी चीजे जायज नहीं है 

उदाहरण के तौर पर शराब पीना, नाचना, गाना 
ये तो इस्लाम में बहुत बड़ा अपराध है, यहाँ तक की कई जगह तो शराब पर मौत की सजा भी दी गयी है 

शाहरुख़ खान, सलमान खान, सैफ अली खान की कई तस्वीरें शराब पीते हुए आयी है 
फारुख अब्दुल्ला तो शराब का बहुत बड़ा शौखीन है 

ये तमाम लोग नाचते भी है गाते भी है, समझ में नहीं आता की इनके खिलाफ फतवा क्यों नहीं दिया जाता 
क्या अलग अलग मुस्लिमो के लिए अलग अलग इस्लाम है 
आखिर इतना दोगलापन क्यों है भाई ?