बचा लिया देश को मोदी ने, हामिद अंसारी से भी बड़ा कट्टरपंथी बन जाता भारत का उपराष्ट्रपति !



हामिद अंसारी तो जो है सो है 
पर गाँधी का पोता गोपालकृष्ण गाँधी तो हामिद अंसारी से भी बड़ा कट्टरपंथी है 

हामिद अंसारी ने पूजा की थाली पकड़ने से इंकार किया 
तिलक लगवाने से इंकार किया, वंदे मातरम, भारत माता की जय बोलने से इंकार किया 

यहाँ तक की एक कार्यक्रम में तिरंगा पकड़ने से भी इंकार कर दिया 
अब जरा आइये गोपालकृष्ण गाँधी पर 

ये वो शख्स है जिसने सबसे पहले याकूब मेमन के लिए मेहनत शुरू की 
इसी शख्स ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास लिखित में याकूब मेमन के लिए क्षमा याचिका भेजी, और उसे माफ़ कर देने की अपील की 

इतना ही नहीं इसी गोपालकृष्ण गाँधी ने याकूब मेमन को माफ़ करवाने का सारा अभियान चलाया 
एक तरह से आप इसे याकूब समर्थकों का सरगना भी कह सकते है 

इतना ही नहीं, जब बलात्कारी, हत्यारे, लुटेरे औरंगजेब का विरोध हुआ 
दिल्ली में उसके नाम वाली सड़क का नाम अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया, तो विरोध करने वालो में गोपाल कृष्ण गाँधी सबसे पहले था, और इसने औरंगजेब का नाम हटाए जाने का जमकर विरोध किया 

सोच के ही डर लगता है की पहले कांग्रेस ने 10 साल कट्टरपंथी हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाये रखा, और उसके बाद कांग्रेस याकूब/औरंगजेब के समर्थक को राष्ट्रपति की कुर्ती पर बिठा देना चाहती थी 

ये तो सौभाग्य हो भारत का की इस देश में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी हैं 
अन्यथा हामिद अंसारी के बाद गोपाल कृष्ण गाँधी, गाँधी नाम का फायदा उठाकर उपराष्ट्रपति बना होता और 
न जाने क्या क्या ब्लंडर भारत को देखने को मिलते