कड़वा : जैसे जैसे बढ़ रही कट्टरपंथी तत्वों की संख्या, वैसे वैसे हो रही है इनको नयी नहीं समस्या !



ये लेख सेक्युलर तत्वों को पसंद नहीं आएगा, चूँकि सच उनको पसंद नहीं आता 
1947 में देश का बंटवारा हुआ था 
पर उसके लिए दंगा कोलकाता से शुरू हुआ था 1946 में, अगस्त के ही महीने में कोलकाता में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग करते हुए दंगा शुरू किया था 

कट्टरपंथियों की 1946 में देश में कुल जनसँख्या 26% से लेकर 30% थी 
कट्टरपंथी कई इलाकों में 90% तक थे, पुरे देश में उनकी आबादी लगभग 30% थी 

फिर देश का 3 हिस्सों में बंटवारा करना पड़ा 
कट्टरपंथियों ने अपने लिए अलग देश बनाया, 1947 में बचा हुआ भारत बना, जो आज भी है 
कट्टरपंथियों की आबादी 1947 के बाद भारत में 10% से थोड़ी कम थी 
1995 तक कट्टरपंथियों ने वन्दे मातरम, भारत माता की जय का विरोध किया हो ऐसा देखने को नहीं मिला 

पर उसके बाद से कट्टरपंथियों ने वंदे मातरम का विरोध शुरू किया 
2004 के बाद ये भारत माता की जय का भी विरोध करने लगे, और 2014 तक कई कट्टरपंथियों ने जन गण मन का भी विरोध शुरू कर दिया 

क्यूंकि कट्टरपंथियों की संख्या अब 20% से अधिक हो चुकी है और वो 1946 के पहले वाली स्तिथि में 
है कई इलाकों में उनकी संख्या 90% से अधिक है 

आज 2017 में कटरपंथी क्या कहते है जरा गौर कीजिये 

अबू आज़मी : हमे वंदे मातरम बोलने के लिए मजबूर किया, भारत माता की जय बुलवाया गया 
तो ग़दर मचा देंगे, दंगे होंगे, हम आतंकी हो जायेंगे

ओवैसी : कोई हमसे वंदे मातरम, भारत माता की जय नहीं बुलवा सकता 

सेक्युलर तत्व : वंदे मातरम, भारत माता की जय बोलना देशभक्ति का कोई सर्टिफिकेट नहीं है 

अब अगले 5 साल में ये कट्टरपंथी कहना शुरू करेंगे की 
"अगर हमसे दिक्कत है तो हमारी आबादी के हिसाब से हमे अलग देश दे दो", फिर इसी मांग को लेकर दंगे, जैसे 1946 में हुए 
जैसे ही कट्टरपंथियों की आबादी 30% तक हो जाएगी, भारत 1946-47 की स्तिथि में पहुँच जायेगा 
और ये तथ्य है, इसे नकार कर कुछ साल तो इस तथ्य से भागा जा सकता है पर ये तथ्य आने वाले सालों में साबित भी होगा 

पहले भी गाँधी-नेहरू जैसों ने इन कट्टरपंथियों का साथ दिया 
आज भी सारे सेक्युलर और वामपंथी इन कट्टरपंथियों के साथ है 

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