अतीक अहमद और मुख़्तार अंसारी पर योगी की कार्यवाही से नाराज था डाक्टर काफ़िल अहमद खान


वो दिन सबको याद है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा का हाईकमान दिल्ली से लखनऊ तक आत्ममंथन कर रहा था . कई मीटिंगों का दौर चला था उस समय , पर उत्तर प्रदेश के जनमानस की बेहद जबरदस्त मांग के आगे अंत में हर किसी को झुकना पड़ा था और योगी आदित्यनाथ जी जिसे उग्र हिंदुत्व और विशुद्ध भगवा धारी चेहरा वो भी भारत का सबसे बड़ा नाम माना जाता था उनके हाथों में सत्ता सौंप दी गयी ..

सबको याद है वो समय जब एक प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी पूरे भारत में जश्न जैसा माहौल था , ठीक वैसे ही जैसे कभी मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर था .. यहाँ जो सबसे ख़ास बात गौर करने लायक है वो ये थी की जिस भगवा को कभी सामूहिक रूप से साम्प्रदायिक कहा जाता था वही भगवा एक प्रदेश का संचालन करने जा रहा था जिसके बाद राजनीति एक नए करवट की अंगड़ाई ले रही थी ..

जिन जिलों के कभी बिजली आती ही नहीं थी वहां बिजली की समस्या समाप्त हो गयी .. जो हिन्दू समाज दूसरे मत मज़हब की गलती पर भी दोषी बनाया जाता था और बिना वजह मुकदमा झेलता था वो हिन्दू समाज न्याय पाने लगा और प्रदेश एक सूत्र में पिरोने लगा जिसमे उंच , नीच जैसी कोई बात नहीं रह गयी और सब के सब केवल हिन्दू नाम से जाने जाने लगे जो भगवा के नीचे एक साथ आने लगे . तभी अचानक ही सहरानपुर में एक संगठन खड़ा हो गया जिसे सब भीम आर्मी के नाम से जानते थे ... उसका नाम पहले किसी ने कभी नहीं सुना था .. 

वो अचानक ही उभर कर सामने आया और उसका एक मुखिया निकला जिसे सब रावण कहते थे . रावण नाम एकाएक उछाला गया क्योंकि दूसरी तरफ एक नाम रटा जा रहा था " जय श्री राम " . उस रावण ने रामराज्य की तरफ बढ़ते प्रदेश को चुनौती दी और उसको पैसा और दंगाई दोनों एक पार्टी द्वारा दिलाये गए जिसके नाम का सुदर्शन न्यूज पहले से ही खुलासा कर चुका है और उस पर शासन की परोक्ष मुहर भी लग चुकी है .

फिर जैसे तैसे हिन्दुओं को तोड़ने वाली वो कुत्सित मासनिकता का दमन हुआ तो उत्तर प्रदेश के जांबाज़ पुलिस जो अचानक ही आतंकियों के काल होने लगे थे और मुंबई , दिल्ली , पंजाब आदि से आतंकियों को खींच कर लाने लगे थे उन पुलिस वालों पर झूठे आरोपों का सिलसिला शुरू हो गया .. कभी बरेली में , कभी बिजनौर में , कभी रामपुर में , कभी जौनपुर में .. इन सबके लिए औरतों तक को आगे किया गया और अक्सर इसमें एक वर्ग विशेष ही पाया गया .. इसका उद्देश्य केवल एक था .. पुलिस के मनोबल को गिराना और उसके साहस को तोडना .. 

यद्द्पि पुलिस ने अपना कार्य जारी रखा और देवबंद तक से उस आतंकी को खींच लायी जो कई सालों से सत्ता के संरक्षण से एक प्रकार से मौज सा कर रहा था . जब उन्हें लगा की वो प्रयास में सफल नहीं हुए तो भी उन्होंने गली मोहल्ले के भी झगड़े विधानसभा में उठा कर योगी सरकार पर कानून व्यवस्था आदि का आरोप लगाना शुरू कर दिया ..

इसकी वजह मुख्य रूप से समझनी होगी हमें .. कोई भी मुख्यमंत्री अपराध नियंत्रण की शुरुआत गली मोहल्ले के गुंडों से करता है और उन्ही को जेल आदि भेज कर अपनी पीठ खुद थपथपाता है पर योगी आदित्यनाथ ने पहला ही वार उत्तर प्रदेश के सबसे कुख्यात , बाहुबली और दुर्दांत माने जाने वाले अपराधियों से किया ,, वो अपराधी जो किसी सत्ता एक साझीदार तक हुआ करते थे ... 

इसमें मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे वो नाम भी हैं जिन्हे उत्तर प्रदेश में शायद ही किसी में साहस रहा हो चुनौती देने का .. ये सभी के सभी फ़ौरन ही जेलों में भेज दिए गए और उन्हे इस प्रकार से रखा गया जैसे एक सामान्य कैदी रखा जाता है .. मुख्तार और अतीक उत्तर प्रदेश के ऐसे नाम भी थे जिन्हे एक वर्ग बेहद पसंद करता था ..

अतीक को देवरिया जेल में भेजा गया था जो गोरखपुर के काफी करीब है .. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोरखपुर के इस वीभत्स काण्ड में सामने आ रहा नाम डॉक्टर कफील अहमद योगी आदित्यनाथ जी से इसी कारण से हद से ज्यादा चिढ रखता है . योगी आदित्यनाथ ने सांसद रहते हुए ही मुख्तार की दादागीरी को अपने क्षेत्र में पनपने नहीं दिया था जबकि कफील अहमद के बारे में बताया जा रहा है की वो अतीक और मुख्तार से काफी प्रभावित था . वही खुन्नस उसको अंदर ही अंदर खाये जा रही थी , उसको पता था की मुख्तार अंसारी के प्रभाव को फैलने से रोकने वाला अगर कोई है तो वो है योगी आदित्यनाथ . यहाँ बात उस समय की हो रही है जब योगी जी एक सांसद थे ..

फिर अचानक ही जब योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे और उन्होंने अपराध नियंत्रण की शुरुआत उन सबसे शुरू की जो आतंक के दूसरे नाम के रूप में कुख्यात थे .. उनमे से मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद प्रमुख थे .. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मोदी और योगी के लिए अपने विरोध और गुस्से की सीमा से भी अधिक नफरत करने वाला कफील मुख्तार और अतीक पर कार्यवाही को सीधे सीधे आपराधिक नहीं साम्प्रदायिक रूप में लेने लगा और हर दिन , हर पल इस प्रयास में रहने लगा की कब और कैसे वो इसका बदला ले. 

उसे पहले से ही योगी आदित्यनाथ मुसलमानो के शत्रु के रूप में दीखते थे इसके प्रमाण उसके ट्वीट आदि को देख कर कोई भी जान सकता है .. इसीलिए जब उसके अधीनस्थ अस्पताल में श्री योगी आदित्यनाथ जी का दौरा हुआ तब उसने योगी जी को बताया था की वहां सब सही चल रहा था . एक बार भी उसने किसी भी खामी की तरफ इशारा नहीं किया क्योंकि उसके मन में कुछ और ही चल रहा था . 

ये तमाम लोग बता रहे हैं ख़ास कर वहां के जो स्थानीय निवासी है कि डाक्टर कफील अपनी निजी क्लिनिक में आने वाले मरीजों से भी भाजपा , योगी , मोदी अदि को वोट ना देने और एक पार्टी को ही जिताने की बाते किया करता था . लाचार और असहाय मरीजों के साथ वो मरीज जो राजनीति में बिलकुल भी रूचि नहीं लेते थे डॉक्टर कफील उनसे भी योगी और मोदी की बुराई बताता था .

फिर अचानक ही कई मासूमों की असमय मृत्यु हुई .. पहली वजह सामने आयी आक्सीजन की कमी की , पहला कारण सामने आया प्रशासनिक लापरवाही का , पहला हीरो सामने आया डॉक्टर कफील अहमद और सारा दोष अचानक ही डाला जाने लगा योगी आदित्यनाथ जी पर .. माताओं के चीखते समय भी कफील ने हंस हंस कर मुस्करा मुस्करा कर फोटो खिचवाई , वो मुस्कान एक विजयी भाव समेटे हुए थी अपने अंदर ,, ऐसे भाव जैसे वो सफल हो गया है .

 उसने बढ़ चढ़ कर फोटो खिचवाई और हर काम में मुस्लिम हीरों खोजने वाली मीडिया ने अचानक ही देश को एक नया मसीहा बिना सोचे और बिना समझे दे दिया जिसमे से कुछ तो इस पूरी साजिश में शामिल भी माने जा सकते हैं . पर सुदर्शन न्यूज प्रतिबद्ध था सच को सामने लाने के लिए और उसने अपनी जमीनी पड़ताल की जिसके बाद इस पूरी कुत्सित साजिश का पर्दाफाश हुआ है . अभी इसमें और भी पेंच निकलने बाकी हैं . जल्द ही इस अपराध , राजनीति और चिकित्सा के पूरे रैकेट का पर्दाफाश होगा सिर्फ और सिर्फ सुदर्शन न्यूज पर ..

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