शानदार : चीनी राखियों का बाजार 80% तक गिरा, मार्किट पहुंचकर पूछ रही बहनें, "चाइनीज तो नहीं"


वाकई देश की बहनें जागरूक हो चुकी हैं, रक्षाबंधन पर चीनी राखियों का बाजार हज़ारों करोड़ का हो चूका था 
पर इस बार चीनी राखियों के सेल में 80% की कमी आ चुकी है, बहने राखियां खरीदने से पहले दुकानदार से पूछताछ कर रही है, "ये चाइनीज तो नहीं है न"

चीन के साथ डोकलाम विवाद का असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है। राखी का सामान बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि मार्केट में चीन के उत्पादों की मांग में भारी कमी देखने को मिल रही है। व्यापारियों का मानना है कि शायद जनभावना के कारण या फिर देशभक्ति की वजह से चीनी राखियां इस साल बाजार से गायब हैं। भारत में बनी राखियों से बाजार सजा हुआ है और उनकी ही अच्छी बिक्री भी हो रही है। 

रक्षाबंधन इस साल 7 अगस्त को है। सोशलमीडिया पर चीन के उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम चल रही है और इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राखी के सामान में चीन के उत्पाद नदारद नजर आ रहे हैं।


 शाहगंज के राखी विक्रेता मुकेश ललवानी कहते हैं, 'इस साल खुद रक्षाबंधन के सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने बड़ी संख्या में चीन के उत्पादों के बहिष्कार का फैसला किया है। चीन हमारे पैसों का प्रयोग हमें ही धमकाने के लिए कर रहा है। हम उन्हें पैसे कमाने का मौका क्यों दें?' 

ललवानी ने बताया, 'इस बार हमारे पास सिर्फ भारत में बनी राखियां ही हैं। ग्राहक भी उनकी ही डिमांड करते हैं। यह सही है कि भारत में बने उत्पादों की लागत अधिक होने के कारण उन पर कम मुनाफा मिलता है, लेकिन फिर हम सोचते हैं कि हिंदुस्तानी उत्पादों को बेचने पर पैसा देश में ही रहेगा।'

कुछ इसी तरह की भावना ग्राहकों की भी है। सुनीता सिंह कहती हैं, 'सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप में भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार के मेसेज मिलते हैं। मैंने फैसला किया है कि हम किसी तरह के चीनी उत्पादों का प्रयोग नहीं करेंगे।'