प्रधानमंत्री से भी बड़े बंगले पर 25 सालों से कब्ज़ा जमाये बैठी है सोनिया गाँधी, टैक्स पेयर के पैसों की लुटम लूट !


नोट - ये पोस्ट संजय द्विवेदी जी के वाल से ली गयी है, इसमें हमने कुछ एडिट नहीं किया है 

क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

भारत की स्वयंभू बेताज महारानी, उसका राजकुमार और उसकी राजकुमारी.. !!
वो भारत की राजधानी दिल्ली के हृदय स्थल में बने हुए उस लहीम-शहीम विराट महल में रहने वाली.. वहां की एकछत्र साम्राज्ञी है।

25 वर्षों से भी अधिक, और वो उस स्थान की एक विशेष् अनुकम्पा प्राप्त निवासिनी है, जिस जगह का पता भारतीय डाक विभाग में बंगला नं. 10, जनपथ, अकबर अली रोड, नई दिल्ली, 110001 के तौर पर दर्ज है।

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25 साल से इस सरकारी बंगले पर सोनिया गाँधी का कब्ज़ा 

मूल रूप से वो इटली के, कभी दाने-दाने को मोहताज रहे, भूखे-नंगे, फटेहाल और बेहद विपन्न परिवार से सम्बंध रखती है, जो आज इंग्लैण्ड की महारानी एलिजाबेथ तक को खरीद लेने की हैसियत रखते हुए दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला है।

आज उसकी औकात दो बिलियन डॉलर से भी अधिक है, सिर्फ इसलिए कि वो भारत जैसे "गरीब" देश की छाती पर बैठ कर "राजनीति का धन्धा" करती है। 

ये औरत और कोई नही, बल्कि वही है जिसका छद्मनाम सोनिया गान्धी है.. असल में एंटोनियो एडवीज अल्बिना माइनो ।

एंटोनियो माइनो, पिछले 25 वर्ष से जिस 10 जनपथ पर कब्जा किए बैठी है, वो दरअसल भारत के प्रधानमंत्री के राजकीय निवास 7, लोक कल्याण मार्ग, जो पहले 7 रेसकोर्स रोड के नाम से जाना जाता था, से भी कहीं अधिक बड़ा है।

एक RTI से मिले जवाब के अनुसार, सोनिया गांधी के घर की पैमाइश है पंद्रह हजार एक सौ इक्यासी वर्गमीटर.. जबकि 7, लोक कल्याण मार्ग 14, 101 वर्गमीटर रकबे में स्थित है।

एक गिरती-कांपती-मरती हुई पॉलिटिकल पार्टी की विदेशी मूल की अध्यक्षा भारत के प्रधानमंत्री से अधिक जगह घेरे बैठी है.. दिल्ली के दिल में.. तो क्या इस विसंगति पर प्रश्न नही उठने चाहिएं ?

यदि इस पर एक सर्वे किया जाए, तो कितने लोग होंगे जिनकी जानकारी मे ये बात होगी ?

2013-14 में, इस शाही निवास की केवल बिजली की मरम्मत का खर्च 51 करोड़,43लाख, 318 रुपए था, जो इससे पिछले वर्ष के मरम्मत खर्च 7 करोड़ 82 लाख 968 रुपए के मुक़ाबिल करीब 7 गुना अधिक था.. 
जबकि 2011-12 में ये कुछ 2 करोड़ 65 लाख 681 रुपए था।

यानी 2013-14 में 14 हजार 91 रुपए की तो बिजली की ही मरम्मत हो रही थी हर दिन ?
मेरे कोई जानकार मित्र बताएंगे कि बिजली उपकरण बनाने की एक् ठीक-ठाक फैक्ट्री लगाने की लागत क्या होगी ?

और ये सारे पैसे सरकार दे रही है.. सरकार, जिसका खजाना हम लोगों से जबरन निचोड़ी गई की पसीने की बूंदों से भरता है..

आप जाइये.. और लाख रुपए लोन मांग कीजिए सरकार से, अपनी बूढ़ी माँ के इलाज के लिए..
चप्पलें घिस जाएंगी जनाब.. और माँ तो मर ही जाएगी।

दूसरे शब्दों में कहूँ तो गुप्त बीमारियों से घिरी उस विदेशी महारानी साहेबा के शाही रहन-सहन का ख़र्चा टैक्स-पेयर्स उठा रहे हैं.. यानी हम-आप.. !

उधर, महारानी का "कुंआरा" राजकुमार.. अर्थात अधेड़ युवक राहुल गांधी.. उसके रहने हेतु पंद्रह हजार वर्गफुट के इस महल में जगह नहीं बचती..

2 जन के परिवार के लिए ये "मकान" छोटा पड़ता है, तो उसके लिए अलग से एक बंगला अलॉट है.. 12, तुग़लक़ लेन.. मात्र 5 हजार 23 वर्गमीटर में फैला हुआ.. ?

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ये राहुल गाँधी का आलीशान बांग्ला 

चलिए.. सांसद है, तो ये तो उसका "हक़" बनता है.. पर क्या नैतिक आधार पर टैक्स-पेयर्स का पैसा बचे, ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए गांधियों को ?

अब मजाक की हद्द देखिए.. राजकुमारी साहेबा जो कि अब विवाहित भी है.. उसे 35, लोधी एस्टेट पर 2 हजार 7 सौ वर्गमीटर का लकदक बंगला अलॉट है.. जब कि वो न तो संसद की, न किसी इस या उस सदन की कोई सदस्यू है.. क्षमा कीजिएगा.. सदस्या..

उसकी पात्रता केवल इतनी कि वो गांधियो में से एक थी.. तो विशेष अनुकम्पा तो बनती ही है शाही परिवार हेतु..
चाहे वो सत्ता में हो या सत्ता से बाहर.. ढाई दशक में आज तक किसी सरकार की हिम्मत नही हुई इस विदेशी औरत से अवैध कब्जा खाली कराने की..

और अब ये आए हैं.. हिन्दू हृदय सम्राट.. 
60% कार्यकाल तो इनका भी पूरा हो चुका है.. देखें क्या होता है.. ?
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