22 अगस्त- बलिदान दिवस कारगिल रक्षक शिव सिंह छेत्री, अंतिम सांस तक जंग लड़ी इस्लामिक आतंक से


भले ही कोई कितनी भी ढपली पीट ले बिना खड्ग बिना ढाल की . भले ही कोई कुछ भी कर ले अपने झूठे प्रचार के लिए पर ये सच अब सबकी जुबान पर आ चुका है की भारत की आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल के नहीं बल्कि वीरों के बलिदान से आयी है और उसी आज़ादी के साथ अखंडता को अभी हमारे सेना के जवानो ने अपने लहू की किश्तों से संभाल रखा है ...

भारत की एकता और अखंडता बचाते हुए खुद को स्वाहा कर गए उन तमाम वीर बलिदानियों में से एक हैं गोरखपुर में जन्मे वीर बलिदानी शिव सिंह छेत्री जी जिनका आज है बलिदान दिवस .

गोरखपुर के चारफाटक पुल से बिछिया कालोनी की तरफ उतरते ही दाहिने हाथ पर है वीरता और शौर्य की वो गौरव गाथा अमर बलिदानी शिव सिंह छेत्री की प्रतिमा के रूप में है जो आज भी वहां से गुजरने वाले एक एक व्यक्ति को भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणो की आहुति देने की प्रेरणा देती है . 

बलिदानी शिव सिंह छेत्री इस्लामिक आतंकियों से भारत भूमि की रक्षा करते हुए कश्मीर में आज ही के दिन अर्थात 22 अगस्त 1999 को सदा के लिए अमर हो गए थे .. इनके पूजयनीय पिता जी का नाम श्री गोपाल है और इनकी पूज्य्नीया माता जी का नाम गीता देवी जी है ...

माँ गीता देवी जी को अभी भी वो दिन याद है जब वाराणसी की सेना भर्ती में जा कर उनका ये जांबाज़ बेटा भर्ती हुआ था और उसके कुछ ही समय बात ये वीर अपनी उसी मान से अंतिम बार आशीर्वाद लेकर ये कहते हुए गया था की माँ दुश्मनो ने हमारी जमीन हथिया ली है .. आशीर्वाद दो की उसको वापस पाने में हम सफल हों .. 

इस वीर बलिदानी को अगस्त को कुपवाड़ा सेक्टर में गोली लगी थी और घायल अवस्था में ही ये वीर दुश्मन पर गोलियां बरसाता रहा बिना पानी जान की परवाह किये हुए और अंततः 22 अगस्त को सेना के अस्पताल में ज्यादा रक्त बह जाने के कारण गोरखा रेजिमेंट का ये अमर बलिदानी सदा सदा के लिए अमर हो गया .. 

ऐसे वीर और शौर्य मूर्ति को आज अर्थात २२ अगस्त उनके बलिदान दिवस पर दैनिक भारत बारम्बार नमन , वंदन और अभिनन्दन करता है और ऐसे वीरों की गौरवगाथा क सदा ही जनमानस तक पहुंचने का संकल्प भी दोहराता है ..

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