तुष्टिकरण नहीं देश पहले : इजराइल यात्रा से साफ़ हो गया मोदी अबतक के सर्वश्रेष्ठ PM


पीएम मोदी के इजरायल दौरे से भारत में एक कड़ा राजनीतिक संदेश गया है। राजनीतिक जानकार का कहना है कि मोदी के इस दौरे से साफ पता चलता है कि बीजेपी मुसलमानों के वोटों पर निर्भर नहीं है।

यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसकी वजह से विपक्षी पार्टियां इस पश्चिम एशियाई मुल्क से रिश्तों को खुलकर स्वीकार करने में अभी तक असफल रही हैं। बता दें कि पीएम मोदी का इजरायल दौरा एक ऐतिहासिक है क्योंकि 70 साल में पहली बार कोई नेता इजरायल दौरे पर गया। 

वहीं मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी का मानना है कि पिछली सरकारें किस तरह 'वोट बैंक' पॉलिटिक्स से बंधी हुई थीं और बीजेपी अब 'नेशन फर्स्ट' पॉलिसी अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 

बता दें कि नोटबंदी की वजह से आम लोगों को हुई परेशानियों के बावजूद मोदी को समाज के विभिन्न तबकों से इस मुद्दे पर जोरदार समर्थन मिलता नजर आया था। अब पार्टी जीएसटी पर भी वैसा ही समर्थन मिलने की उम्मीद कर रही है। विरोधी पार्टियों की रणनीति से अलग दिखने में बीजेपी के भी कई फैसले अहम रहे। 

पार्टी ने यूपी चुनावों में एक भी मुस्लिम कैंडिडेट खड़ा नहीं किया। जानकारों के मुताबिक, इस कदम का मकसद ही यही था कि बीजेपी अपने प्रतिद्वंद्वियों से अलग दिखे। बता दें कि बीएसपी जैसी पार्टियों ने चुनाव में 100 मुस्लिम कैंडिडेट्स खड़े किए थे, वहीं समाजवादी पार्टी ने अपनी कामयाबी में मुस्लिमों के वोटों को बेहद अहम माना था।