लुप्त होता बंगाली हिन्दू, और लुप्त होती बंगाली संस्कृति, अधिकतर बंगाल आज इस्लामिक इलाका है !



बंगाली भाषा में रेनबो यानि इंद्रधनुष को "रामधेनु" कहा जाता था 
जब से बंगाली भाषा बनी, बंगाली संस्कृति बनी, इंद्रधनुष को "रामधेनु" ही कहा जाता था, पर अब मुस्लिम तुष्टिकरण में इसे "रंगधेनु" बना दिया गया, बंगाली संस्कृति ऐसे ही लुप्त होती जा रही है
बंगाली हिन्दू भी बंगाल से लुप्त हो रहे है,  देखिये इस इलाके को बंगाल माना जाता था, जहाँ बंगाली भाषा थी 

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ये पूरा बंगाली हिन्दुओ का इलाका था, अब अधिकतर बंगाली इलाके से बंगाली संस्कृति ख़त्म हो चुकी है, बांग्लादेश इस्लामिक राज्य बन चूका है, वहां दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा, इत्यादि अब बड़ी ही मुश्किल से कहीं कहीं होती है 

और जो बचा हुआ बंगाल भारत में है, वहां के भी कई इलाकों में यही स्तिथि है 
दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा जो मूल रूप से बंगाली संस्कृति है, उसका नाश हो चूका है, यहाँ तक की कई इलाकों में हिन्दुओ को अपने शव जलाने में भी दिक्कते आने लगी है 

बंगाल के कुछ जिले जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा इत्यादि तो मुस्लिम बहुल हो चुके है 
और धीरे धीरे बाकि इलाको की भी यही स्तिथि होती जा रही है, न केवल बंगाली हिन्दू लुप्त होते जा रहे है, बल्कि बंगाली संस्कृति भी लुप्त होती जा रही है 

बांग्लादेश में हिन्दू 24% से अब 6% पर पहुँच चूका है, पर पश्चिम बंगाल में भी हिन्दू 70% के नीचे पहुँच चूका है 
और 70% में से 35% तो वामपंथी है, जो सिर्फ नाम से हिन्दू है 
गौमांस खाना, हिन्दू के खिलाफ काम करना वामपंथियों की असल पहचान है 

सेकुलरिज्म और वामपंथ में इतना बड़ा इलाका अपनी संस्कृति खो चूका है 
बांग्लादेश भी बंगाली इलाका था, आज बंगाली भाषा तो है पर बंगाली संस्कृति नहीं, इस्लामिक संस्कृति है, पश्चिम बंगाल भी अगले 15-25 सालों में बांग्लादेश हो जाये तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी