ब्रेकिंग : G-20 में बोली एंजेला मर्केल, "बर्बादी को न बुलाये चीन, वरना कोई बीच बचाव को नहीं आएगा"



जर्मनी में G-20 सम्मेलन शुरू हो गया है। पीएम मोदी सहित कई विश्व के बड़े नेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

G-20 के शुरू होते ही जर्मनी के चांसलर एजेंला ने अपरोक्ष रूप से चीन पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ देश दुनिया में शांति नहीं चाहते हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर युद्ध की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया समेत पूरी दुनिया शांति चाहती है।

वहीं, इस सम्मेलन में आतंकवाद से मुकाबला, जलवायु परिवर्तन और विश्व व्यापार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में होंगे। ‘परस्पर संबद्ध दुनिया को एक आकार देने’ (शेपिंग एन इंटर-कनेक्टेड वल्र्ड) की थीम पर आधारित इस सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय में किया जा रहा है जब इसमें हिस्सा लेने वाले कई संभावित नेताओं के बीच के मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं। 

इनमें से अधिकतर मतभेद अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जलवायु परिवर्तन और मुक्त व्यापार को लेकर सार्वजनिक मंचों पर दी गई राय से संबंधित हैं।इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दाेआन, फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रोन समेत अन्य शीर्ष नेताओं के हिस्सा लेने की संभावना है। उन्नीस देशों और यूरोपीय संघ के संगठन को ग्रुप ऑफ 20 कहा जाता है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनिशया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमरीका इस समूह के सदस्य हैं।  

हैमबर्ग सम्मेलन की मेजबान और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की जन्मभूमि होने के साथ-साथ वामपंथी कट्टरपंथियों का सरकार विरोधी गढ़ भी है। इस सम्मेलन से पहले कम-से-कम 30 प्रदर्शन होने की उम्मीद है, जिसमें पूंजीवाद विरोधी समूहों के सदस्यों समेत हजारों लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है।

स्थानीय प्रशासन को इन प्रदर्शनों के शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद है और समारोह स्थल की सुरक्षा के लिए करीब 15,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा करीब 4,000 कर्मी हवाईअड्डा और ट्रेनों की सुरक्षा पर नजर रखेंगे। 

आतंकवाद से मुकाबला और आॢथक सुधार जैसे मुद्दों के 12वें जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान छाए रहने की संभावना है लेकिन साथ ही मुक्त और खुला व्यापार, जलवायु परिवर्तन, आव्रजन, सतत विकास और वैश्विक स्थायित्व जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना है।