CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, सोनिया-मनमोहन ने बना दिया था भारतीय सेना को खोखला !



CAG की रिपोर्ट से कांग्रेस बेनकाब, वक़्त रहते बदल गई सरकार वरना भारत को भुगतना पड़ता इसका अंजाम..

कांग्रेस राज में भारत के हालात बद से बदतर हो गए थे लेकिन वक़्त रहते मोदी जी ने देश की कमान संभल ली और भारत को एक बहुत बड़ी मुसीबत से बचा लिया है. बता दें कि कांग्रेस की पोल खोलते हुए सीएजी ने एक बड़ा खुलासा किया है कि सीमा पर वायुसेना की 06 ‘स्ट्रेटेजिक मिसाइल’ स्कावड्रन को तैनात किया जाना था लेकिन वो पिछले 7 सालों से नहीं हो पाया है. इसका कारण मूलभूत सुविधाओं की कमी और बीईएल द्वारा बनाई गई इन मिसाइलों में तकनीकी खामियां हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CAG द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में लिखा है कि ‘विरोधी द्वारा सीमा पर लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा था उसे देखते हुए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने वर्ष 2009 में सीमा पर 06 मिसाइल स्कॉवड्रन तैनात करने को हरी झंडी दी थी. इसके लिए बीईएल यानि भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड को वायुसेना के लिए ‘स्ट्रेटेजिक मिसाइल’ तैयार करनी थी. बता दें कि ये सब कांग्रेस राज में हुआ था.

CAG रिपोर्ट के मुताबिक ‘वायुसेना ने इसके लिए रक्षा मंत्रालय पर आरोप लगाया है  इन मिसाइलों के रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं के लिए करार नही किया, जिसके चलते देरी हो गई. इसकी जिम्मेदार कांग्रेस सरकार है’.

बता दें कि सीएजी रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि बीईएल की मिसाइलों में खामियां थी. सीएजी के मुताबिक, जो 80 मिसाइलें वायुसेना को सौंपी गईं उसमें से 20 का टेस्ट हुआ तो पाया गया कि 6 मिसाइल यानि 30 प्रतिशत ना तो तय दूरी तक पहुंच पाईं और ना ही वे ऑपरेशनली तैनात करने लायक थीं.

बताते चलें कि पिछले एक हफ्ते में सीएजी की ये दूसरी बड़ी रिपोर्ट है जो भारतीय सेनाओं की तैयारियों पर सवाल खड़ी कर रही है. कुछ दिन पहले ही सीएजी ने कहा था थलसेना के पास मात्र 10 दिन का ही गोलाबारूद है, जबकि सेना के पास 40 दिन का वॉर रिजर्व होना चाहिए. हालांकि रिपोर्ट के बाद रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद में कहा था कि सेना के पास युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त गोलाबारूद है.