श्रीराम के अपमान के खिलाफ सब साथ होते तो वंदे मातरम का निरादर न हुआ होता : सुरेश चव्हाणके


सबसे पहले सेना का अपमान हुआ , हम चुप रहे .

फिर पुलिस वालों पर झूठे केस दर्ज करवाए गए और यहाँ तक की बटला के बलिदानी तक की वर्दी पर कीचड़ उछाला गया , हम चुप रहे ..

फिर भगवान श्री राम का अपमान किया गया , हम फिर चुप रहे ..

अब भारत के राष्ट्रगीत वन्देमातरम पर ऊँगली उठाई गयी है ....

क्या इस बार भी हम चुप रहेंगे .. उनके विशेषाधिकार ऊपर की लिस्ट से निकाले जा सकते हैं ..शायद उनका विशेषाधिकार सेना से बड़ा है , शायद उनका विशेषाधिकार पुलिस वालों से भी बड़ा है उस पुलिस वालों से जो अपना बलिदान दे चुका हो , शायद उनका विशेषाधिकार संसार के सर्वमान्य श्री राम से भी बड़ा है और तो और अब उनका विशेषाधिकार भारत माता के सम्मान से भी बड़ा है क्या ? क्या उस विशेषाधिकार को इसी लिए संरक्षित किया जा रहा है जिस से वो जब चाहें तब हमारे राष्ट्रगीत , हमारी फ़ौज , हमारे राम और हमारे रक्षक पुलिस वालों के ऊपर थोप सकें और उस से वो जिसे चाहें जो कह दें ..

इस जनता ने उन्हें पहले से ही माननीय , नेता जी कह कर और उनके आगे झुक कर सम्मान दिया .. इसी जनता से अलग दिखने के लिए उनकी गाडी पर लाल बत्ती लगा दी गयी और उनके हूटर लगी गाड़ियों को सबको किनारे कर दिया जाता था , यहाँ तक की कभी कभी बीमार को ले जा रही एम्बुलेंस को भी .. 

ये विशेषाधिकार ये साबित कर रहे हैं की उनकी जनता द्वारा जय भी ही .. पर यदि अब वो इन सीमाओं को तोड़ कर भगवान् व् राष्ट्र से ऊपर खुद को रखने की मांग कर रहे हैं तो क्षमा करें ये कम से कम एक राष्ट्रवादी के लिए संभव नहीं है ... सीमाओं को सुरेश चव्हाणके तोड़ रहे हैं या वो तथाकथित माननीय ये शायद जनता अच्छे से देख रही है ..

इस समय जरूरत है एकजुटता की .. एकजुटता अपने राम के लिए . एकजुटता अपने सम्मान के लिए , एकजुटता अपने हिन्दुस्तान के लिए ... यहाँ उनकी पहिचान भी जरूरी है जो भारत के ही अंदर रह कर चीन और पाकिस्तान से ज्यादा घातक बने हुए हैं .. भारत के ही अंदर रह कर श्रीराम , वन्देमातरम , हिंदुस्तान के लिए आवाज उठाने वालों को खतरा किस से है ? शायद चीन और पाकिस्तान से तो बिलकुल नहीं .. ये फैसला करना अब जनता का काम है .........

यदि जनमानस को लगता है की मैं गलत नहीं हूँ तो वो मेरा साथ दे ......