असल वजह ये है, मोदी से जलन मची है जिनपिंग को, दुनिया में जिनपिंग से ज्यादा भाव मोदी को मिल रहा है



1947-1948 चीन और भारत  दोनों आज़ाद हुए 
उसके बाद से ही 2014 तक चीन का राष्ट्रपति हमेशा से भारत के प्रधानमंत्री से विश्व के मंच पर अधिक इज़्ज़त, और भाव पाने वाला होता था, चीनी राष्ट्रपति को भारत के प्रधानमंत्री से अधिक महत्त्व मिलता था 

पर 2014 के बाद से ये बिलकुल बदल गया 
मोदी और जिनपिंग दोनों एक साथ अपने अपने देशों के प्रमुख बने, पर इतिहास ने करवट ले ली 
जिनपिंग मोदी का मुकाबला नहीं कर पा रहे है 

पहले तो भारत की इकॉनमी लगातार 3 सालों से चीन के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है, दूसरी ये की दुनिया के अलग अलग मंचों पर चीनी राष्ट्रपति से अधिक भाव भारतीय प्रधानमंत्री को मिल रहा है 

चाहे अमरीका हो, यूरोप हो, रूस हो 
जिनपिंग से ज्यादा खातिरदारी नरेंद्र मोदी की हो रही है, और ये चीज जिनपिंग बर्दास्त नहीं कर पा रहे है 
और भारत की तरफ तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही है 

पिछले कई दिनों से भारत और चीन के बीच सिक्किम बॉर्डर पर तनाव हो रहा है 
और इसका असर दोनों देशों की इकॉनमी और कंपनियों पर भी दिखने लगा है, विदेशी निवेशकों ने चीनी कंपनियों से दुरी बनानी शुरू कर दी है 
वहीँ भारतीय कंपनियों में सिंगापूर, यूरोप और अमरीका के देशों से निवेश लगातार बढ़ रहा है 

पिछले 5 दिनों में चीन का स्टॉक एक्सचेंज अपने निछले स्तर पर गिर चूका है, रोज खुलता है और रोज 
गिरता है, वहीँ भारतीय स्टॉक एक्सचेंज नए उच्चतम स्तरों पर काम कर रहा है, NSE और BSE दोनों अपने उच्चतम स्तर पर है 

जहाँ भारत की कंपनियों में पैसा आ रहा है, क्यूंकि निवेशकों को कंपनियों पर भरोसा है 
वहीँ चीनी कंपनियों के शेयर पिट रहे है, क्यूंकि निवेशकों को चीनी कंपनियों पर भरोसा नहीं है, और इसी कारण चीन का स्टॉक मार्किट गिर रहा है, भारत का ऊपर जा रहा है 

मोदी का मुकालबा जिनपिंग नहीं कर पा रहा है, और इसी कारण सीमा पर तनाव फैला रहा है चीन 
और बर्बादी भी चीन की ही हो रही है 
इसे कहते है मति भ्रष्ट होना, चीन भारत का कुछ बिगाड़ नहीं सकता, तनाव बढाकर अपनी ही बर्बादी को जरूर बढ़ा रहा है, मोदी से जलन के कारण जिनपिंग खुद अपने ही पैर काट रहा है, जो भारत 
के लिए बेहतर है