गाँधी-नेहरू को बहुत याद किया, जरा याद करें अमर बलिदानी कैप्टेन विक्रम बत्रा को !!


जानिए कारगिल में शहीद रहे परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के पराक्रम के अनजाने तथ्य !

शहीद विक्रम बत्रा की कही ये बात आज भी एक जोश पैदा करती है “या तो मैं तिरंगे को लहराकर आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर। लेकिन मुझे यकीन हैं, मैं आऊंगा ज़रूर।”

आपकी जानकारी के लिए हम बता दें की आज के दिन ही भारत माँ का ये लाल वीरगति को प्राप्त हुए थे भारत माँ के इस लाल ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग दिया था.ये अंतिम शब्द भारतीय सेना के शेरशाह शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के हैं. 

आपने यह नाम निश्चित रूप से कारगिल युद्ध के दौरान सुना होगा, जिसे अब वक़्त के साथ भुला दिया गया है, लेकिन होना तो यह चाहिए कि देश के प्रत्येक नागरिक को भारत के इस लाल का सिर्फ़ नाम ही नही, बल्कि उसके शौर्य और उसके शहादत की कहानी पता हो.कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना माँ भारती के इस लाल के नाम से ही थर-थर काँप रही थी.

 

आज हम अपने पाठकों के लिए माँ भारती के लिए अपने प्राणों का त्याग देने वाले शहीद विक्रम बत्रा के यहाँ कुछ तथ्य आप सभी से साझा कर कर रहे हैं जिससे हम और आप सभी गर्व से कह सकें कि बहादुर शेरशाह इस देश की शान था.


शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को प्राथमिक शिक्षा उनकी माँ से ही मिली थी, जो खुद एक अध्यापिका थीं.बचपन से ही एक जनून मन में सवार था भारत माँ की रक्षा करनी है दुश्मनों से और वो तभी हो सकती है जब सेना ज्वाइन की जाए,और आगे जाकर ऐसा ही हुआ भारत माँ के इस लाल ने सेना ज्वाइन की और आगे जाकर वीरता की ऐसी गाथा लिखी जो आज स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.

बत्रा भारतीय सेना के अफसर थे, जो कारगिल युद्ध में दुश्मन के जवाबी हमले में घायल हुए एक अन्य जवान को बचाने के दौरान शहीद हो गए थे.अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने अपने जवान साथी की जान को बचाते हुए अपनी जान दे दी थी.उस समय एक अफसर होने के नाते वो चाहते तो किसी सिपाही को भेज सकते थे उस वक़्त उनके साथ जवान ने कहा था साहब जी में जाता हु तो शहीद बत्रा ने कहा था नहीं तुम्हारी बीवी है बच्चे हैं तुम नहीं में जाता हूँ.


19 जून, 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने दुश्मन के नाक के नीचे से 5140 प्वाइंट पर क़ब्ज़ा कायम करने में सफल हुई थी.

भारत माँ के लाल शहीद बत्रा ने 5140 प्वाइंट पर क़ब्ज़ा करने के बाद अपनी मर्जी से अगले मिशन के रूप में 4875 प्वाइंट पर भी क़ब्ज़ा करने निर्णय लिया था.यह प्वाइंट समुद्र स्तर से 17,000 फुट की उँचाई पर और 80 डिग्री सीधी खड़ी चोटी पर है.इसी मिशन में बत्रा दुश्मनो से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. 5140 प्वाइंट पर कब्जा करने के बाद जब उन्होंने रेडियो से “ये दिल मांगे मोर”कहा तो पूरा देश ख़ुशी से झूम उठा.


बत्रा 7 जुलाई 1999 को इस मिशन के शुरुआती घंटों में दुश्मन के जवाबी हमले के दौरान घायल हुए एक अधिकारी को बचाने के प्रयास में भारतीय सेना की एक टुकड़ी का कमान संभाले हुए थे.

ऐसा कहा जाता है कि इस बचाव कार्य के दौरान उन्होंने घायल अधिकारी को सुरक्षित पोज़िशन पर धकेलते हुए यह कहा था कि “तुम्हारे बच्चे हैं, तुम एक तरफ हट जाओ”।

इसी मिशन में बत्रा दुश्मनो से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. उनके सम्मान में कप्तान बत्रा के नाम से विभिन्न छावनियों को नाम दिया गया, जिसपर भारतीय सेना गर्व  करती है.

Image result for 5140 प्वाइंट पर क़ब्ज़ा
2003 की फिल्म ‘एलओसी’ कारगिल युद्ध के सैनिकों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में बनाई गयी, जिसमें कथित तौर पर, अभिषेक बच्चन ने कैप्टन बत्रा की भूमिका निभाई थी।

मरणोपरांत कैप्टेन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.विक्रम मात्र 24 वर्ष की उम्र में शहीद हुए, यह वह उम्र होती है जब हम अपनी जिंदगी के बारे में सोचना शुरू करते हैं.आज उनके शहीदी दिवस पर मैं पूरे भारत की ओर से उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, आप सदैव हमारे ह्रदय में रहेंगे.

जब तक सूरज चाँद रहेगा तब तक भारत माँ के इन शहीद लालों का नाम रहेगा.लेकिन देश का दुर्भाग्य देखें आज ये कांग्रेस के नेता भारतीय सेना का अपमान कर रहे हैं ये वामपंथी भारतीय सेना के खिलाफ अपमान जनक टिप्णियाँ कर रहे हैं.ये सब अपमानजनक बातें सुनकर शहीद परिवार वालों के दिल के ऊपर क्या गुजरती होगी इसका अंदाजा भी शायद आज किसी को नहीं होगा.


आज हम अपने घरों में सुरक्षित हैं तो सिर्फ भारतीय जवानों की वजह से अगर सेना के लिए कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो कम से कम बुरा भी मत कीजिये जय हिन्द जय भारत !