कटु सत्य : हमेशा से ये गंधिया खानदान देशभक्तों का दुश्मन और आतंकियों का समर्थक रहा है !



कांग्रेस ने अपनी तरफ से इस देश का राष्ट्रपति उम्मीदवार तय किया है 
कोई और नहीं मिला, कांग्रेस ने मोहनदास गाँधी के पोते गोपालकृष्ण गाँधी को उमीदवार बनाया है 
यानि ये शख्स इस देश का उपराष्ट्रपति बनने की रेस में है 

और आप यकीन मानिये ये देश का एक बड़ा दुःर्भाग्य ही है, की गोपालकृष्ण गाँधी जैसे लोग भी उपराष्ट्रपति बनने की रेस में है 

भगत सिंह और सुखदेव राजगुरु को अंग्रेजी अदालत ने फांसी की सजा दे दी 
पर इरविन ने खुद रिटायर होने के बाद लंदन में बताया था की, उनकी सरकार भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने में हिचकिचा रही थी 

अंग्रेजी सरकार को डर था की भगत सिंह को फांसी दी तो देश भर में दंगे होंगे, और कई अंग्रेज अफसर और अन्य कर्मचारी मारे जा सकते है 
ऐसे में इरविन ने मोहनदास गाँधी से सलाह ली और कहा की भगत सिंह को फांसी देना ठीक रहेगा 

तो मोहनदास गाँधी ने इरविन से कहा की हां भगत सिंह को फांसी दे दो, कुछ नहीं होगा देश में 
और इसी के बाद अंग्रेजी सरकार ने भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटका दिया 

और उसी गाँधी का पोता है गोपालकृष्ण गाँधी 
इसने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को लिखित में दया याचिका भेजी जिसमे इसने आतंकवादी याकूब मेमन को माफ़ कर देने की अपील करी

मोहनदास गाँधी ने देसभक्तों को फांसी पर लटकाने की मांग की, वहीँ गाँधी के पोते ने आतंकी को माफ़ कर देने की मांग करि, साफ़ होता है की ये गंधिया खानदान हमेशा से ही देशभक्तों का दुश्मन और आतंकियों, देशद्रोहियों और जिहादियों का समर्थक रहा है 

और ये शख्स अब भारत का उपराष्ट्रपति बनने की रेस में है, ये वाकई इस देश के लिए बड़ा दुर्भाग्य है