बड़ी खबर : चीनी मीडिया ने ख़ुद कहा - महाशक्ति है भारत, अब उसे हराना नामुमकिन है !



दुनिया मान रही भारत का लोहा, चीन की नजर में भी भारत अव्वल ।

चीन (China) के पड़ोसियों से संबंधों को मधुर बनाने की मोदी सरकार (Modi government) के कूटनीतिक प्रयास से चीन दबाव में आने लगा है. चीन की मीडिया (Media) ने अपनी सरकार को चेताया है. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत अब महाशक्ति बन चुका है. उसे हराना नामुमकिन है. बता दें कि ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने एक लेख में कहा है कि पिछले तीन सालों में भारत की सैन्य ताकत बेहद मजबूत हुई है. हर देश भारत का साथ देने को तैयार है, तबाही मचाने वाली कई मिसाइलें (Missile) भारत ने बना ली हैं.

बॉर्डर लाइनही बॉटम लाइन :-

अखबार का कहना है कि चीन की सरकार को बातचीत के जरिए भारत से डोकलाम (Dokalm) विवाद सुलझाना चाहिए. चीन की स्टेट काउंसिल के तहत काम करने वाली और आधिकारिक प्रेस (Official press) एजेंसी सिन्हुआ के एक लेख में कहा गया है कि चीन के लिए सीमा रेखा ही बॉटम लाइन थी. पिछले सप्ताह भी सिन्हुआ और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अखबार पीपुल्स डेली ने इसका प्रयोग किया था. लेख के मुताबिक, “डोकलाम क्षेत्र से सेना वापस बुलाने की चीन की मांग को भारत लगातार अनसुना कर रहा है”.

लद्दाख के गतिरोध की तरह नहीं है मौजूदा संकट :-

इसमें कहा गया है कि भारत (India) को मौजूदा स्थिति को पिछले दो मौकों की तरह नहीं देखना चाहिए जहां 2013 और 2014 में लद्दाख (Ladakh) के पास दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने खड़ी हो गई थीं. राजनयिक प्रयासों से दोनों सेनाओं (Armies) के बीच संघर्ष को सुलझा लिया गया था. हालांकि इस बार पूरा मामला अलग है. अखबार ने बताया कि दक्षिणी पूर्वी कश्मीर (South east kashmir) के इस हिस्से में भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाएं तकरीबन मिलती हैं.

तीन दशक का सबसे लंबा गतिरोध :-

भारत और चीन की सेनाओं के बीच मौजूदा गतिरोध पिछले तीन दशकों का सबसे लंबा गतिरोध माना जा रहा है. भारतीय सैनिक (Indian soldiers) सीमा पार कर अवैध तरीके से डोकलाम इलाके में घुस आए और चीनी सैनिकों (Chinese soldiers) द्वारा बनाई जा रही सड़क के निर्माण को रोक दिया था. हालांकि भारत ने सड़क निर्माण की ओर इशारा करते हुए कहा है कि क्षेत्र में सीमा अभी तय नहीं है और चीन मौजूदा स्थिति को न बदले.

पहली बार भारत ने किया सीमा समझौते का उल्लंघन :-

सिन्हुआ के मुताबिक, भारत ने पहली बार दोनों देशों के बीच सीमा समझौते का उल्लंघन किया है. भारत को यह पता होना चाहिए कि डोकलाम में उसका ठहराव अवैध है और इसका मतलब ये मतलब नहीं है कि उसकी सेना वहां रूकी रहेगी.

विदेश सचिव के बयान का जिक्र :-

लेख में विदेश सचिव (Foreign Secretary) एस जयशंकर (S. Jaishankar) के हालिया बयान का भी जिक्र है, जिसे सकारात्मक दिखाया गया है. इसका कहना है, “जैसा कि एक पुरानी चीनी कहावत है, शांति सबसे कीमती चीज है”. इतना ही नहीं भारत के विदेश सचिव सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने हाल ही में सिंगापुर में इस मसले पर सकारात्मक टिप्पणी की है. जयशंकर का कहना है कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को विवाद नहीं बनाना चाहिए.

सिन्हुआ ने अपने लेख में भारत में चीन विरोधी भावनाओं का भी जिक्र किया है. लेख के मुताबिक, हाल के सालों में भारत के राष्ट्रवादी समूहों ने चीन विरोधी भावनाओं को भड़काया है.